हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने रिश्ते के भाई के साथ शादी रचाने वाली एक युवती को नारी निकेतन लखनऊ को तत्काल रिहा करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि जहां तक वर्जित संबंधों में शादी का सवाल है इसके लिए पक्षकारों को समुचित राहत सक्षम अदालत से मांगने की छूट है। यह आदेश ऐसी राहत में अवरोध नहीं होगा।
अदालत के आदेश के बाद शाम करीब पांच बजे युवती को नारी निकेतन से रिहा कर दिया गया। न्यायमूर्ति विष्णु चंद्र गुप्ता ने सोमवार को यह आदेश युवती के पिता की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निपटारा करते हुए दिया। अदालत के आदेश के तहत युवती को नारी निकेतन से लाकर कोर्ट में पेश किया गया। उसने कोर्ट को बताया कि वह करीब 21 साल की है और उसने बीए पास किया है।
साथ ही उसने यह भी बताया कि गत एक सितंबर को आर्य समाज मंदिर में उसने एक व्यक्ति से अपनी मर्जी से शादी की है अदालत ने कहा कि युवती बालिग है, जैसा कि उसकी हाईस्कूल की मार्क्सशीट से पता चलता है, जिसमें उसकी जन्म तिथि 25 दिसम्बर 1993 दर्ज है।
कोर्ट ने कहा कि याचिका में युवती की उम्र 17 साल होना कहा गया है, जबकि यह हाईस्कूल मार्क्सशीट के मद्देनजर ठहरने लायक नहीं है।युवती के पिता ने जवाबी हलफनामा के साथ दाखिल की गई मार्क्सशीट को चुनौती भी नहीं दी है। ऐसे में युवती की मर्जी के मुताबिक उसे मुक्त किए जाने के अलावा कोर्ट केपास कोई विकल्प नहीं है।