कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लोग कोई भी प्रयास करने से नहीं चूक रहे हैं। इसका नतीजा है कि लखनऊवासी रोजाना सात लाख दवाएं खरीद रहे हैं। दवा विक्रेता वेलफेयर समिति के अध्यक्ष विनय शुक्ला का कहना है कि कोरोना संकट में जिंक और विटामिन सी के बाद आइवरमेक्टिन की मांग में जबरदस्त इजाफा हुआ है। उनके अनुसार, शहर में 4000 रिटेल काउंटर हैं।
सभी की बिक्री का औसत निकाल लें तो आइवरमेक्टिन की एक लाख गोलियों की रोजाना बिक्री हो रही है। जबकि पहले एक महीने में भी नहीं हो पाती थी। इसी तरह जिंक की हर दिन की बिक्री का औसत 2.50 से तीन लाख के बीच है और विटामिन-सी की तीन लाख गोलियां हररोज बिक रही हैं। इसी तरह गिलोय का रस 100 बोतल बमुश्किल से रोज बिकता था, अब 1000 बोतलों का औसत है।
डॉक्टर के पर्चे के बिना ले जा रहे दवाएं
गोमतीनगर में सिंघल मेडिकल स्टोर के अनुज अग्रवाल बताते हैं कि सीएमओ द्वारा सूचना के बाद से आइवरमेक्टिन लेने वालों की मांग बढ़ी है। मेरे यहां से 100-150 की सेल हर दिन की है। विकास नगर के दिनेश मेडिकल हॉल के सिद्धार्थ व निशातगंज के दीपांशु मेडिकल स्टोर के दीपांशु बताते हैं कि ये दवाएं तो लोग डॉक्टर की सलाह के बिना खा रहे हैं।
5000 गुना अधिक क्षमता से रोकती है आइवरमेक्टिन
मेडिकल स्टोर से दवा लेते लोग
- फोटो : amar ujala
सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आशुतोष दुबे कहते हैं कि आइवरमेक्टिन के बारे में प्रयोगशाला में देखा गया है कि ये दवा वायरस की वृद्धि को 5000 गुना अधिक क्षमता से रोकती है। इसके अलावा कोई नुकसान नहीं है।
इसके आधार पर इसे दिया जा रहा है। उल्टी या गैस्टिक की समस्या तो किसी भी दवा से हो सकती है। पांच साल से कम उम्र की बच्चों व गर्भवती को नहीं देना है। डेंगू में दवा का अच्छा रिस्पॉन्स मिला था। इसीलिए इसे प्रमोट किया जा रहा है। हालांकि, डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
जिंक व विटामिन प्राकृतिक स्रोतों से ले रहे तो गोली की जरूरत नहीं
बलरामपुर अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. नरेंद्र देव कहते हैं कि विटामिन सी की 500 एमजी की एक गोली, 50 मिलीग्राम की जिंक की एक गोली एक दिन में लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि यदि प्राकृतिक स्रोतों से यदि खाने में ले रहे हैं तो इसकी जरूरत नहीं। वैसे भी एक्स्ट्रा सप्लीमेंट लगातार नहीं लेना चाहिए। डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
दवा कारोबार को ऑनलाइन बिक्री ने संभाला
विनय शुक्ला
- फोटो : amar ujala
कोरोना संकट में दवा कारोबार की बिक्री पर खास असर नहीं पड़ा है। जो थोड़ा बहुत हुआ, उसे ऑनलाइन कारोबार व रिप्लेसमेंट दवाओं व कोरोना सेफ्टी किट ने संभाल लिया है। दवा एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी मयंक रस्तोगी बताते हैं कि हर महीने करीब 125-150 करोड़ के बीच दवा का कारोबार होता है।
दुकानों से बिक्री में 30-35 फीसदी की कमी आई है। दवा विक्रेता कल्याण समिति के अध्यक्ष विनय शुक्ला कहते हैं कि दवा कारोबार को रिप्लेसमेंट दवाओं (कोरोना से बचने को खाई जाने वाली और मास्क, सैनिटाइजर व अन्य चीजों) की बिक्री ने संभाल लिया है। नए मरीज हैं नहीं, जो थोड़े पढ़े-लिखे हैं, वे ऑनलाइन आर्डर कर रहे हैं। इधर के महीनों में ऑनलाइन कारोबार दोगुनी वृद्धि के साथ करीब 30 करोड़ रुपये हर महीने का हो गया है।
कौन सी गोली कितने की
दवा के नाम कीमत (एमआरपी औसत)
आइवरमेक्टिन 25 रुपये
जिंक 4 रुपये
विटामिन सी 2 रुपये