मसूढ़े न होने पर भी अब बाई कार्टिकल इम्प्लांट से दांत लगाए जा सकते हैं। खासतौर से पैदाइशी मसूढ़े न बने हो या फिर बहुत बुजुर्ग लोग जिनके मसूढ़े बिल्कुल खत्म हो चुके हों, उनके लिए ये तकनीक प्रभावी है।
केजीएमयू के दंत संकाय के ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल विभाग ने ये सुविधा शुरू की है। टाइटेनियम से बने इस इम्प्लांट के लगने के बाद सामान्य लोगों की तरह खाना खाया जा सकेगा। साथ ही दांतों की वजह से उनका चेहरा भी सही दिखेगा।
ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के डॉ. यूएस पाल ने बताया कि जिन लोगों के दांत टूट गए हों उनके लिए इम्प्लांट लगाने की तकनीक है।
अब ऐसे मरीज जिनके मसूढ़े विकसित न हुए हों, उनमें भी इम्प्लांट लगाकर दांत लगाए जा सकते हैं। इसके लिए बाई कार्टिकल इम्प्लांट लगाया जाता है। ये विशेष तरह के इम्प्लांट होते हैं जो मसूढ़ों की जगह जबड़े की हड्डी में लगाए जाते हैं।
पहले हड्डी में छेद किया जाता है। इसके बाद इन इम्प्लांट को वहां लगा दिया जाता है। इसके ऊपर दांत लगाए जाते हैं। बाई कर्टिकल तकनीक से अब ऐसे बच्चे जिनमें पैदाइशी विकृति के कारण दांत न निकले और मसूढ़े भी न हों, उन्हें दांत लगाया जा सकता है।