फ्लैटों का कभी आवंटन नहीं खुला और ये हालात हो गए
- फोटो : amar ujala
एलडीए ने 2011 में विराजखंड में स्प्रिंग डेल स्कूल के पास मुख्य सड़क पर आवासीय व व्यावसायिक कैंपस बनाया। अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के तहत यहां चार मंजिला अपार्टमेंट बनाया गया। इसमें 400 वर्ग फीट के 32 फ्लैट बनाए गए। इनके निर्माण पर एलडीए बजट से 1.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए। एमआई बिल्डर ने अपार्टमेंट को बनाया। उम्मीद थी कि 32 जरूरतमंद परिवारों को आशियाना मिलेगा। फिर विराजखंड जैसी लोकेशन पर थे तो इनकी मांग तो होती ही। पर, निर्माण के बाद इनको कभी आवंटन के लिए प्रक्रिया में नहीं लगाया गया।
एलडीए ने 2011 में विराजखंड में स्प्रिंग डेल स्कूल के पास मुख्य सड़क पर आवासीय व व्यावसायिक कैंपस बनाया। अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के तहत यहां चार मंजिला अपार्टमेंट बनाया गया। इसमें 400 वर्ग फीट के 32 फ्लैट बनाए गए। इनके निर्माण पर एलडीए बजट से 1.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
एमआई बिल्डर ने अपार्टमेंट को बनाया। उम्मीद थी कि 32 जरूरतमंद परिवारों को आशियाना मिलेगा। फिर विराजखंड जैसी लोकेशन पर थे तो इनकी मांग तो होती ही। पर, निर्माण के बाद इनको कभी आवंटन के लिए प्रक्रिया में नहीं लगाया गया।
विराजखंड में बने फ्लैट के हो गए ये हालात
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फ्लैट में किचन की स्लैब एक फीट चौड़ाई की बनाई गई। आपको भले ही सवाल करें कि इतनी कम चौड़ाई वाले प्लेटफॉर्म पर कैसे खाना बनाया जा सकता है, पर निर्माण के वक्त एलडीए के इंजीनियरों को इस पर कोई हैरानी या परेशानी नहीं हुई। दरवाजे तो पड़े-पड़े ही सड़ गए। साफ है कि घटिया थे। बाथरूम और बिजली की फिटिंग पूरी तरह बेकार हो चुकी है। बहरहाल, एलडीए के इंजीनियर अब कहते हैं कि लगातार खाली पड़े रहने से ऐसा हाल हो गया।
ये हैं जिम्मेदार
24 से ज्यादा इंजीनियरों, सुपरवाइजरों ने नहीं किया अपना काम
एलडीए के जोन-1 के अभियंत्रण में 2011 से लेकर 2018 तक तैनात रहे 24 से अधिक अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, अवर अभियंताओं और सुपरवाइजरों ने अपना काम ठीक से नहीं किया। इनकी जानकारी में होने के बाद भी प्राइम लोकेशन की संपत्ति को बेचने का प्रयास नहीं किया गया। संपत्ति के लावारिस पड़े होने की सूचना भी शीर्ष स्तर पर नहीं दी गई। नियोजन विभाग भी ले-आउट और नंबर प्लान तैयार कर देने में फेल रहा है।
विराजखंड में बने फ्लैट
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इनके निर्माण पर करीब किए करोड़ों रुपये खर्च
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आवासीय अपार्टमेंट के ठीक सामने एलडीए ने 40 दुकानों का बाजार बनाया है। वहीं सड़क के दूसरी तरफ पार्किंग के लिए जगह भी छोड़ी। इन दुकानों को कभी बेचा नहीं गया तो कुछ में लोगों ने कब्जा कर लिया। इनके निर्माण पर करीब 1.20 करोड़ रुपये एलडीए ने खर्च किए हैं।
सरकारी संपत्ति का नुकसान है ये...जवाबदेही तो तय हो
इन सबकी जिम्मेदारी तय कर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और राजस्व हानि की वसूली की जानी चाहिए।
जल्द पूरी होगी आवंटन प्रक्रिया
वर्ष 2011 में निर्माण हो जाने के बाद भी फ्लैटों की बिक्री गोमतीनगर जैसी योजना में नहीं करना चौंकाने वाला है। इसके लिए जिम्मेदारों को चिह्नित करते हुए जल्द आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। - प्रभु एन सिंह, वीसी, एलडीए