जमीन साफ-सुथरी है या अवैध कब्जे में फंसी है, अब इसका पता भूलेख पोर्टल पर चल जाएगा। क्योंकि प्रशासन ने अवैध कब्जे में फंसी जमीन का गाटा संख्या के आधार पर विवरण 31 जुलाई तक पोर्टल पर अपडेट करने के निर्देश दिए हैं।
इससे ग्राम पंचायत स्तर पर अवैध कब्जे में फंसी जमीन को गाटा संख्या के आधार पर खतौनी कॉलम में जाकर पहचाना जा सकेगा। नई व्यवस्था से सरकारी जमीन को कब्जा कर बेचने और स्वामित्व से जुड़े फर्जी दस्तावेज बनाने पर रोक लगेगी। साथ ही एंटी भू माफिया टॉस्क फोर्स की कार्रवाई भी प्रभावी बनेगी।
प्रभारी अधिकारी व एडीएम प्रशासन एसपी गुप्ता ने बताया कि सभी लेखपालों व नायब तहसीलदारों को निर्देश दिए गए हैं कि वह अवैध कब्जे में फंसी जमीनों को चिह्नित कर ग्राम पंचायतवार इनकी रिपोर्ट तैयार करें। इसी के आधार पर सरकारी व निजी जमीनों का विवरण व डेटा बेस तैयार कराया गया है।
तहसीलवार तैयार होने वाली इस भू-अभिलेख रिपोर्ट की फीडिंग को 31 जुलाई तक राजस्व विभाग के भूलेख पोर्टल के खतौनी कॉलम में दर्ज कराया जाएगा। इसकी फीडिंग के बाद पोर्टल पर खतौनी कालम में जमीन की गाटा संख्या लिखकर क्लिक करते ही लेखपाल रिपोर्ट खुल जाएगी, जिससे यह पता लग सकेगा कि उक्त जमीन अवैध कब्जेदारी में फंसी है या नहीं।