राजकीय मेडिकल कॉलेजों, चिकित्सा संस्थानों में ट्रॉमा, इमरजेंसी व सेमी इमरजेंसी सेवाओं में इलाज के लिए मरीज का कोविड-19 टेस्ट निगेटिव होना जरूरी होगा।
रिपोर्ट निगेटिव देखने के बाद ही डॉक्टर मरीज की जांच करेंगे। महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा की अध्यक्षता में गठित समिति ने नॉन कोविड अस्पतालों में सेमी इमरजेंसी सेवाओं के संचालन के दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा रजनीश दुबे ने बताया कि टेलीमेडिसिन या ई ओपीडी से चिन्हित मरीजों को सेमी इमरजेंसी में इलाज के लिए एक रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाएगा। उसे मेडिकल कॉलेज में आने का समय और सैंपल कलेक्शन सेंटर का स्थान बताया जाएगा।
मरीजों को सलाह दी जाएगी कि अस्पताल में आने पर उसका व उसके साथ आ रहे तीमारदार का रियल टाइम पीसीआर की जांच निगेटिव होना जरूरी होगा। जिसके लिए वह आईसीएमआर से अनुमोदित प्रयोगशाला से जांच कराकर आ सकते हैं। या राजकीय चिकित्सालय में निर्धारित छूट पर जांच करा सकते हैं।
अस्पताल में आने के लिए इस मरीज की सर्वप्रथम सोशल डिस्टेंसिंग व थर्मल स्कैनिंग आदि का पालन करते हुए ट्रायज एरिया में देखा जाएगा। मरीज को चिकित्सालय में निर्धारित कक्ष में अपने रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ कोविड-19 की जांच करानी होगी व जांच रिपोर्ट निगेटिव आने पर ओपीडी क्षेत्र जो कि अब सेमी इमरजेंसी होगा, उसमें देखा जाएगा।
प्रत्येक चिकित्सालय में सेमी इमरजेंसी एरिया का विभागवार निर्धारण किया जाएगा। प्रवेश पर रोगी व तीमारदार की आरटी पीसीआर रिपोर्ट निगेटिव होने की पुष्टि की जाएगी। निगेटिव रिपोर्ट आने वाले मरीजों का सम्बंधित ओपीडी केबिन में विशेषज्ञ जांच करेंगे।
जरूरत के अनुसार उन्हें पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जांच के लिए भेजा जाएगा। सेमी इमरजेंसी वाले किसी मरीज के भर्ती की स्थिति में एक से अधिक तीमारदार की आवश्यकता होती है तो वो तीमारदार कोविड-19 की जांच आईसीसीएमआर से अनुमोदित प्रयोगशाला से जांच कराकर आ सकते हैं।
राजकीय चिकित्सालय में छूट पर भी जांच कराई जा सकती है। अस्पतालों में प्रवेश से लेकर निकास तक सभी चिकित्सकों, मरीजों, तीमारदारों व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों से सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजेशन, मास्क आदि का अनुपालन आवश्यक रूप से किया जाएगा। सेमी इमरजेंसी एरिया में बिजली, जल आपूर्ति व अन्य अनिवार्य सेवाएं दी जाएंगी।