यूपी की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में फिलहाल मई के मध्य तक बेरोजगारी का कोई संकट नहीं है। तकरीबन 4 करोड़ लोग रबी फसलों की कटाई-मड़ाई व इससे संबंधित कार्यों में लगे हुए हैं। हर साल ही इन दिनों बड़ी संख्या में बाहर काम कर रहे मजदूर फसल कटाई के लिए वापस अपने गांव आते हैं।
लॉकडाउन से जहां देश-दुनिया में बेरोजगारी का संकट है, वहीं यूपी की ग्रामीण अर्थव्यवस्था इससे काफी हद तक अछूती है। यहां खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों में इतना ज्यादा काम है कि लोगों को बैठने की फुरसत नहीं है। कृषि विभाग की मानें तो इन दिनों 60-70 फीसदी लोग खेती के कामों में व्यस्त हैं। इस बार प्रदेश में रबी सीजन में 130 लाख हेक्टेयर में बोआई हुई है।
सबसे ज्यादा 99.04 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं है। इसके अलावा जौ, मक्का, चना, मटर, मसूर, तोरिया, सरसों और अलसी की फसलें बोई हैं। अमूमन अप्रैल के प्रथम सप्ताह में इन फसलों की कटाई शुरू हो जाती है और यह काम 15 मई तक होता है। लॉकडाउन 25 मार्च से शुरू हुआ और हर साल यही वो वक्त होता है, जब तक मजदूरी के लिए शहरों में गए तमाम मजदूर फसलों की कटाई के लिए गांव वापस आ जाते हैं, ताकि फसलों की कटाई-मड़ाई कर परिवार के लिए साल भर के लिए अन्न का इंतजाम कर सकें।
इस बार भी 25 मार्च तक बड़ी संख्या में मजदूर वापस गांव आ चुके थे। कृषि विभाग का तो यहां तक कहना है कि अगर बाहर काम करने वाले ये प्रवासी मजदूर गांव न लौटें तो 70 फीसदी तक कटाई का काम प्रभावित होगा। सरकार ने कृषि संबंधी गतिविधियों को आवश्यक सेवा मानते हुए लॉकडाउन से मुक्त रखा है। यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्र में एक अनुमान के अनुसार 3-4 करोड़ लोग कृषि कार्य में लगे हुए हैं। इस बारे में कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रबी फसलों की कटाई अप्रैल के प्रथम सप्ताह से मई के द्वितीय सप्ताह तक चलती है। वर्तमान में 60 से 70 फीसदी आबादी रबी फसल की कटाई-मड़ाई और उससे जुड़ी गतिविधियों में लगी है।