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कोरोना: चिकन कारोबार को तगड़ा झटका, निर्यात ऑर्डर अटके

Wed, 22 Dec 2021 05:16 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

कोरोना के ओमिक्रॉन स्वरूप का असर चिकन कारोबार पर बुरी तरह पड़ रहा है। चिकन का 92 फीसदी कारोबार चौपट हो चुका है। हफ्तेभर में कनाडा-इटली से मिलने वाले ऑर्डर भी अटक गए हैं।
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चिकन कारोबार। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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चिकनकारी उद्योग से जुड़े कारोबारी अब ओमिक्रॉन की आशंका से सहमे हैं। एयरपोर्ट पर चिकन आउटलेट चलाने वाले बड़े कारोबारियों का कहना है कि 92 फीसदी कारोबार चौपट हो गया है। पहले धागे (यार्न) की बढ़ती कीमतों ने चोट दी। अब अंतरराष्ट्रीय उड़ानें फिर टल जाने से बची उम्मीदें भी खत्म हो गईं हैं। पहली दिसंबर से ही बाजार पूरी तरह बैठ गया है।

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स्टॉक की कमी नहीं है, पर खरीदार नहीं हैं। लखनऊ चिकनकारी हैंडीक्राफ्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव अग्रवाल कहते हैं कि इस एक हफ्ते में कनाडा-इटली से मिलने वाला ऑर्डर नहीं मिल पाया है। अभी बुकिंग होती तो मार्च में डिलीवरी की जाती।

चिकन कारोबारी व हजरतगंज ट्रेडर्स एसोसिएशन के सचिव विनोद पंजाबी कहते हैं कि उनका खुद का आउटलेट एयरपोर्ट पर है। इस वक्त कार्गो बंद हैं और फ्यूल की बढ़ती कीमत से महंगा भी। ऐसे में यहां से जाने वाला माल डंप है और यात्री भी कम हैं।
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ऐसे में टूरिस्ट पर निर्भर चिकनकारी कारोबार चलेगा कैसे। उनके हिसाब से महज आठ फीसदी के करीब यात्री हैं। कोविड से पहले के सौ फीसदी होने वाले कारोबार से कोविड के बाद के हालात की तुलना करें तो आठ फीसदी ही कारोबार बचा है। हम कारोबारियों के लिए परचेजिंग जरूरत पर की जाती है और शॉपिंग करने पूरा परिवार निकलता है, जो अब रहा नहीं।

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प्योर जॉर्जट और धागे की बढ़ी कीमतों ने बढ़ाई समस्या

चिकन कारोबारी संजीव झिंगरन कहते हैं कि प्योर जॉर्जट का 400-450 रुपये मीटर वाला कपड़ा 625-650 रुपये मीटर हो गया है। पांच गांठ कपड़े मांगने पर एक गांठ ही मिल पा रहा है। इसी तरह धागे का 1600 रुपये वाला बंडल अब 2600 रुपये तक में मिल रहा है।

वहीं, ऑनलाइन कपड़ा कारोबार करने वाली हर्षिता कहती हैं कि कपड़े व धागे की कीमतों में उछाल का असर बिक्री पर पड़ रहा है। जनपथ के चिकन कारोबारी दिलीप खैराजानी कहते हैं कि अफवाहों के बीच बाहर जाने वाले माल को लेकर कारोबारी असमंजस में हैं। प्रभात गर्ग कहते हैं कि तैयार माल भी डंप सा लग रहा है।
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