देर शाम करीब साढ़े आठ बजे कमरे के अंदर से चार साल के बेटे के रोने की आवाज सुनकर पड़ोसियों ने दरवाजा धक्का देकर खोला तो मोनिका अंदर बेहोश थी।
इसकी सूचना इंस्पेक्टर को दी। इंस्पेक्टर आनंद प्रकाश शुक्ला ने बताया कि उसे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जहां डॉक्टरों ने उसे खतरे से बाहर बताया है। डॉक्टरों के मुताबिक मोनिका ने नींद की दवा का अतिरिक्त खुराक ली थी। इंस्पेक्टर ने बताया कि मोनिका सीसीटीएनएस में अपना काम बेहतर तरीके से करती थी। इसकी वजह से उसे कांस्टेबल ऑफ द मंथ का पुरस्कार दो दिन पहले दिया गया था।