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15 गांवों को गोद लेकर नजीर पेश करे एसजीपीजीआई

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15 गांवों को गोद लेकर नजीर पेश करे एसजीपीजीआई
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एसजीपीजीआई का दीक्षांत समारोह
राज्यपाल ने प्रोफेसरों को भी एक टीबीग्रस्त बच्चा गोद लेने की दी सलाह
चिकित्सक अपनी मातृभूमि से जुड़ाव बनाए रखें, गांव में दो साल काम कर नया अनुभव लें
एसजीपीजीआई 15 गांवों को गोद ले। वहां के लोगों का इलाज करके नजीर पेश करे, ताकि दूसरे संस्थान भी इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हों। यह कहना है राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का। शनिवार को वह एसजीपीजीआई के 24वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं। राज्यपाल ने बताया कि राजभवन के अधिकारियों ने एक-एक टीबी पीड़ित बच्चे को गोद ले रखा है। यहां के प्रोफेसर भी इस दिशा में कदम बढाएं, जिससे समाज में नया संदेश जाए।
राज्यपाल ने कहा कि मेरी सलाह है कि एसजीपीजीआई से डिग्री हासिल करने वाले चिकित्सक मातृभूमि से जुड़ाव बनाए रखें। दो साल ग्रामीण इलाकों में मरीजों की सेवा करके यह साबित करें कि सरकार ने उन पर जो खर्च किया है, उसे वे राजी खुशी देश को लौटा रहे हैं। गांवों में मरीजों की सेवा से वे नया अनुभव प्राप्त करेंगे। भारत मेडिकल टूरिज्म के रूप में विकसित हो रहा है। यहां इलाज कराने के लिए विदेश से भी लोग आ रहे हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन का संदेश वीडियो के जरिए सुनाया गया। चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह ने भी डिग्री प्राप्त करने वाले मेडिकल छात्रों का हौसला बढ़ाया। मुख्य सचिव अनूप चंद पांडेय, चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. रजनीश दुबे ने संस्थान की उपलब्धियां गिनवाईं।
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एक संकाय सदस्य सहित 151 को मिलीं उपाधियां
दीक्षांत समारोह में एक संकाय सदस्य सहित 151 को राज्यपाल ने उपाधि प्रदान की। इसमें उत्कृष्ट शोध के लिए न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. संजय बेहारी को एसआर नायक अवॉर्ड दिया गया। इसी तरह उत्कृष्ट छात्र के रूप में प्रो. एसएस अग्रवाल अवॉर्ड और डॉ. आरके शर्मा अवॉर्ड डॉ. सुब्रत आर्या को एवं डॉ. आरके शर्मा बेस्ट एमसीएच स्टूडेंट अवॉर्ड डॉ. डी कृष्णा को दिया गया। इसके अलावा पीएचडी के छह, डीएम के 34, एमसीएच के 18, एमडी 22, एमएचए के छह, 28 को पीडीसीसी एवं 33 बीएससी नर्सिंग की डिग्री दी गई।
डॉक्टर की विनम्रता, मरीज की दवा के समान
दीक्षांत समारोह में चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि मरीज बड़ी उम्मीद के साथ डॉक्टर के पास आते हैं। भले ही 50 की जगह 200 मरीजों की भीड़ हो, लेकिन चिकित्सक बिना झुंझलाहट मरीज के सिर पर हाथ भरा रख दे तो उसकी आधी बीमारी दूर हो जाती है। इसलिए चिकित्सक को विनम्रता के साथ परोपकार की इच्छा शक्ति दिखानी चाहिए।
हीमोफीलिया और थैलेसीमिया का नोडल सेंटर बना पीजीआई
लखनऊ। पीजीआई के निदेशक प्रो. राकेश कपूर ने दीक्षांत समारोह में संस्थान की उपलब्धियां गिनवाईं। उन्होेंने कहा कि यहां हीमोफीलिया और थैलेसीमिया पीड़ितों को राहत देने का प्रयास किया जा रहा है। संस्थान नोडल सेंटर के रूप में काम कर रहा है। मरीजों के इलाज के साथ ही यहां दूसरे सेंटर केचिकित्सकों को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। कोल इंडिया ने करीब 20 करोड़ की मदद की है। एक बच्चे के बोन मैरो ट्रांसप्लांट पर करीब 10 लाख रुपये खर्च होते हैं।
निदेशक ने बताया कि यहां करीब 1250 बेड पर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। इसके बाद भी यहां आने वाले मरीजों को लौटना पड़ता है। नया पांच मंजिला भवन बन रहा है। यह दिसंबर तक तैयार हो जाएगा। इसमें दो मंजिला इमरजेंसी मेडिसिन और दो गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए होगा। एक मंजिला पर मरीज व तीमारदारों से जुड़ी सुविधाएं होंगी। इमरजेंसी मेडिसिन विभाग 210 बेड का बनेगा। इसमें 60 बेड आईसीयू में होंगे। हार्ट अटैक, ब्रेन स्टोक, खून की उल्टी होने और आकस्मिक महामारी जैसी स्थिति उत्पन्न होने पर मरीजों को यहां भर्ती किया जाएगा। इसी तरह गुर्दा प्रत्यारोपण केंद्र में 180 बेड होंगे। यहां रोज करीब 100 डायलिसिस किए जाएंगे और हर सप्ताह छह गुर्दा प्रत्यारोपण होगा। इसके अलावा लीवर ट्रांसप्लांट में 210 बेड होंगे। इस दौरान उन्होेंने बीपीएल, असाध्य सहित विभिन्न मरीजों के खर्च का ब्योरा भी दिया। बताया कि अब तक आयुष्मान के करीब 740 मरीजों का इलाज किया गया है।
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विभिन्न देशों के 113 शोधार्थियों को दी ट्रेनिंग
शैक्षिक विवरण का जिक्र करते हुए बताया कि इस साल 22 नए रिसर्च प्रोजेक्ट मिले हैं। विभिन्न देशों के 113 शोधार्थी यहां से ट्रेनिंग लेकर गए हैं। इस दौरान रजिस्ट्रार डॉ. सोनिया नित्यानंद, सीएमएस डॉ. अमित अग्रवाल, डीन डॉ. एसकेमिश्रा आदि मौजूद थे।
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