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केजीएमयू में धर्मांतरण: डा. जाकिर नाइक की प्रतिबंधित संस्था से जुड़े डॉ. रमीज के तार, यौन शोषण का आरोप साबित

Thu, 08 Jan 2026 11:16 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

केजीएमयू में महिला डॉक्टर के धर्मांतरण के प्रयास में आरोपी डॉ. रमीज मलिक के कनेक्शन प्रतिबंधित संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) से मिले हैं। वहीं, केजीएमयू की विशाखा समिति ने अपनी जांच में डॉ. रमीज को यौन उत्पीड़न का आरोपी पाया है। 
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- फोटो : amar ujala
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विस्तार
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केजीएमयू में महिला रेजिडेंट के यौन शोषण और धर्मांतरण के प्रयास का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आरोपी डॉक्टर रमीज के कनेक्शन प्रतिबंधित संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) से मिले हैं। इस संस्था का संचालक डॉ. जाकिर नाइक विदेश में कहीं छिपा है। यह संस्था धर्मातरण कराती थी, जिसके कारण उसे प्रतिबंधित कर दिया गया था।

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डॉ. नाइक सोशल मीडिया के जरिये युवाओं को धर्मांतरण के लिए उकसाता है। महाराष्ट्र में नाइक ने बड़ी संख्या में धर्मांतरण कराए थे। इसके लिए लोगों को मोटी रकम भी दी गई थी। माना जा रहा है कि डॉ. नाइक के करीबी आरोपी डॉक्टर को शरण दे रहे हैं। डॉ. नाइक विवादित बयानों के लिए भी जाना जाता है। सूत्रों का कहना है कि इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन ने करीब 800 लोगों का धर्मांतरण कराया था।

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मुंबई पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया था। डॉ. नाइक का नाम सामने आने के बाद खुफिया एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। डॉ. रमीज के कनेक्शन की छानबीन की जा रही है। डॉ. नाइक भारत में वांटेड है, उस पर विदेशी फंडिंग और अवैध गत्तिविधियों के भी आरोप हैं।

एक ही मकसद, कट्टरपंथ को बढ़ावा: छानबीन में सामने आया है कि डॉ. रमीज कट्टरपंथ को बढ़ावा देना चाहता था। वह छांगुर के साथ-साथ डॉ. नाइक से भी प्रभावित था। आरोपी के मोबाइल फोन और लैपटॉप मिलने के के बाद पुलिस उसके सोशल मीडिया कनेक्शन की छानबीन करेगी। संस्था का मकसद युवाओं के बीच चरमपंथी और कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देना था।

डॉ. रमीज के घर पर चस्या हुआ कुर्की का नोटिस

लखनऊ पुलिस ने बृहस्पतिवार को पीलीभीत के न्यूरिया कस्बे में और खटीमा के वार्ड 14 में पहुंचकर आरोपी चिकित्सक रमीज मलिक के पैतृक घरों के बाहर कुर्की का नोटिस चस्पा किया। एक घंटे तक चली कार्रवाई के बाद पुलिस टीम वापस लौट गई।

रमीज को पाताल से भी खोजकर निकालेंगेः अपर्णा
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने कहा कि केजीएमयू के डॉ. रमीज को पाताल से भी खोज निकाला जाएगा। नंदिनीनगर में राष्ट्रकक्षा में हिस्सा लेने पहुंचीं अपर्णा ने कहा कि आयोग की पहल के कारण पीड़िता को न्याय मिल रहा है।
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जांच में डॉ. रमीज दोषी, निरस्त हो सकता है दाखिला

विशाखा समिति की रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न का आरोप साबित
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की विशाखा समिति ने डॉ. रमीज के मामले में अपनी जांच पूरी कर ली है। जांच में डॉ. रमीज को यौन उत्पीड़न का आरोपी पाया गया है। इस मामले में केजीएमयू प्रशासन उसका दाखिला रद्द करने के लिए महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा (डीजीएमई) को पत्र लिखने की तैयारी में है।

केजीएमयू के पैथोलॉजी विभाग में रेजिडेंट महिला डॉक्टर ने साथी रेजिडेंट डॉ. रमीज पर यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण के प्रयास का आरोप लगाया था। इस मामले में बनी विशाखा समिति ने प्रारंभिक जांच में पुरुष रेजिडेंट को दोषी बताया था। इसी आधार पर रेजिडेंट को निलंबित किया गया और उस पर एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद से डॉ. रमीज भागा हुआ है।

विशाखा समिति ने अपनी फइनल रिपोर्ट देने से पहले विभाग के सभी डॉक्टरों और कर्मचारियों के बयान लिए। रमीज को भी बयान देने के लिए बुलाया गया, लेकिन वह नहीं आया। समिति ने अपनी जांच पूरी करके केजीएमयू कुलपति को रिपोर्ट सौंप दी है। अब इस मामले में आरोपी के खिलाफ कार्रवाई तय की जा रही है।

आरोपी के मददगारों की जांच रिपोर्ट का इंतजार
विशाखा समिति ने अपनी जांच पूरी कर ली है, लेकिन आरोपी रेजिडेंट की मदद करने वालों की जांच अभी पूरी नहीं हो सकी है। केजीएमयू के कुछ प्रोफेसर पर रेजिडेंट की मदद करने का आरोप है। समिति इनकी भूमिका की जांच कर रही है।
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