फैजाबाद रोड स्थित पारिजात अपार्टमेंट में साल 2019 से आवंटियों की समस्याओं को दूर करने के लिए एलडीए ने तीन ठेकेदार लगाए थे। काम फिर भी अधूरे हैं। आवंटियों का कहना है कि पूछने पर एलडीए अधिकारी काम खत्म होने की अवधि भी नहीं बताते। शुक्रवार को पारिजात के आवंटियों ने बैठक कर एलडीए से समस्याओं को दूर करने की मांग की है।
पारिजात वेलफेयर सोसाइटी के सचिव समर विजय सिंह के मुताबिक आठ साल की देरी से कुछ लोगों को कब्जा मिला, बावजूद इसके 80 प्रतिशत काम अधूरे थे। रेरा, एलडीए और कोर्ट में लगातार शिकायतों के बाद एलडीए ने साल 2019 में पुरानी एजेंसियों को हटाकर तीन टावरों के लिए अलग-अलग एजेंसियों एसकेजी निर्माण, एमके बिल्डर व गीता कंस्ट्रक्शन को काम दे दिया। बावजूद इसके समस्याएं दूर नहीं हो रहीं। समर विजय सिंह का कहना है कि ये ठेकेदार एलडीए के इंजीनियरों तक की नहीं सुनते। इसकी शिकायत एलडीए वीसी से की जा चुकी है। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में सचिव समर सिंह, अध्यक्ष सूर्यकांत सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री राम तिवारी, विद्या सागर पांडेय, संयुक्त सचिव राम नरेश सिंह समेत अन्य आवंटी मुख्यमंत्री से समय लेकर उनसे मामले की शिकायत करेंगे।
77 आवंटी फ्लैट अधूरा होने से नहीं ले पा रहे कब्जा
पारिजात अपार्टमेंट में कुल 406 फ्लैट हैं। साल 2010 तक इनमें से 180 फ्लैट्स की रजिस्ट्री हो चुकी है। 103 फ्लैटों में लोगों ने अपने खर्च पर काम करवाकर रहना शुरू किया। लेकिन इनमें से 77 आवंटी फ्लैट्स के अधूरे कार्य पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।
पार्किंग किसकी पता नहीं
आवंटियों की लगातार शिकायतों के बाद एलडीए ने पार्किंग सुविधा परिसर के बगल में स्थित अवध बस अड्डे की बेसमेंट में दे दी है। आवंटियों का कहना है कि पार्किंग तो मिल जाएगी, लेकिन पार्किंग का मालिक कौन है पता नहीं।
बैठक में उठाई पांच मांगें
1- पुस्तिका में जिन सुविधाओं का वादा है उन्हें जल्द पूरा करें।
2- गैस कनेक्शन, सीसीटीवी और अंतिम पुताई व अन्य सुविधाएं दें।
3- सीसी कैंसिल करें। योजना पूर्ण करने के बाद सीसी कोे जारी किया जाए।
4- फायर उपकरणों को दुरुस्त किया जाए।
5- परिसर की सभी लिफ्ट दुरुस्त की जाएं।
ठेकेदारों को साफ तौर पर कह दिया गया है कि आवंटियों की समस्या जबतक दूर नहीं की जाएगी, तब तक एलडीए की तरफ से उनको एक भी रुपये का भुगतान नहीं किया जाएगा। कार्य को पूरा करें। उसके बाद भुगतान किया जाएगा।
- पवन गंगवार, एलडीए, सचिव