उपभोक्ताओं का पक्ष रेखते राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कई कानूनी सवाल उठाए। उनका कहना था कि नियम विरुद्ध रेगुलेटरी सरचार्ज का प्रस्ताव लाने के लिए बिजली कंपनियों के एमडी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। वर्मा ने कहा कि बीते 9 वर्षो में किसानों, ग्रामीण व शहरी उपभोक्ताओं की बिजली दरों में 84 से 500 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। प्रदेश में प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत केवल 629 यूनिट है। इसका मुख्य कारण महंगी बिजली ही है। उपभोक्ता परिषद ने स्लैब परिवर्तन के प्रस्ताव का भी विरोध करते हुए कहा कि जिसे एक बार आयोग खारिज कर चुका है उसे फिर से लागू कराने का दबाव बनाना गलत है।
दरों में की जाए 25 फीसदी की कमी
वर्मा ने कहा कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 19537 करोड़ रुपये निकल रहा है। इसके एवज में बिजली दरों में एकमुश्त 25 प्रतिशत या तीन साल तक हर वर्ष आठ-आठ प्रतिशत की कमी की जाए जिससे कोरोना संकट में उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिल सके। उपभोक्ता परिषद ने बिजली आपूर्ति लागत, परिचालन व रख-रखाव खर्च, लाइन हानियों के आंकड़ों पर भी सवाल उठाते हुए इसे खारिज करने का अनुरोध किया।
महंगी बिजली खरीद पर बिजली कंपनियों को कठघरे में खड़ा करते हुए उन्होंने आयोग से इसकी उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। कई अन्य मुद्दों पर भी परिषद ने बिजली कंपनियों को घेरा। वर्मा ने कहा कि पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा 200 यूनिट तक फ्री बिजली का वादा कर रही थी। यहां उल्टा किया जा रहा है। सरचार्ज का बोझ लादने की साजिश हो रही है। यह दोहरा चरित्र बर्दाश्त नही किया जाएगा।