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सीएम कैसे पूरा करेंगे वादा, अफसर दिखा रहे ठेंगा!

Mon, 14 Jul 2014 10:40 AM IST
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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सूबे के मुख्यमंत्री जनता को सुविधाएं देने के लिए हरसंभव कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं लेकिन अफसर ही उनकी नहीं सुन रहे हैं।
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यूपी सरकार ने बिजली कंपनियों का घाटा दूर करने के लिए कंसल्टेंट की नियुक्ति कर रिपोर्ट मांगी थी लेकिन 20 महीने बाद भी कंसल्टेंट अपनी रिपोर्ट नहीं दे सका है।

जबकि दिसंबर 2012 में कंसल्टेंट की नियुक्ति के समय मौजूदा सरकार ने दो माह में रिपोर्ट देने को कहा था।

इसी रिपोर्ट के अनुसार सरकार घाटा कम करने के उपाय अपनाती। काम में हीलाहवाली पर विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नाराजगी जताई है।
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नियुक्ति के लिए खर्च किए 60 लाख

दरअसल सपा सरकार ने बिजली कंपनियों का घाटा कम करने की पहल की थी।

कई बैठकें हुई और दिसंबर 2012 में मुख्य सचिव स्तर पर बैठक के बाद यह तय हुआ कि बिजली वितरण कंपनियों के घाटे को खत्म करने व वितरण क्षेत्र को दुरुस्त करने के लिए एक ‘टर्न अराउंड स्ट्रेटजी’ तैयार की जाए।

इसके बाद यह तय किया गया कि इस काम के लिए एक कंसल्टेंट नियुक्त किया जाए। दिसंबर 2012 में ही 60 लाख रुपये में पीएफसी कंसल्टिंग लिमिटेड नई दिल्ली को कंसल्टेंट के रूप में नियुक्त कर दो माह में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए।
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20 महीने में नहीं पूरा हुआ काम

कंसल्टेंट की नियुक्ति पर पावर कॉर्पोरेशन के निदेशक मंडल ने अपनी स्वीकृति तुरंत दे दी। उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद ने जब पावर कार्पोरेशन से कंसल्टेंट की रिपोर्ट का खुलासा करने की मांग की तब पता चला कि अभी तक कंसल्टेंट कंपनी ने अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है।

यह रिपोर्ट अभी तैयार हो रही है। उपभोक्ता परिषद ने यह सवाल उठाये हैं कि जिस कार्य को दो महीने में पूरा होना था, उसमें 20 माह बीतने के बाद भी अभी तक रिपोर्ट नहीं आयी है।

परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि यह ऊर्जा क्षेत्र का दुर्भाग्य है। इस मामले में सरकार को जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
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