रायबरेली। जिले में 17 किमी निर्माणाधीन रिंग रोड 12 साल बाद भी बनकर तैयार नहीं हो पाया है। निर्माण पूरा न होने से शहरवासियों को जाम की समस्या से जूझना पड़ रहा है। लखनऊ-प्रयागराज हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। जिस एजेंसी को यह काम सौंपा गया, उसे एक साल पहले ही रिंग रोड का निर्माण कराकर पूरा कर लेना था, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद काम कछुए की चाल से हो रहा है।
रिंग रोड का निर्माण वर्ष 2012 में शुरू हुआ था। 210 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले रिंग रोड प्रथम फेज का काम कराने के लिए कई कंपनियां आईं, जो आधा अधूरा काम छोड़कर चली गईं। वर्ष 2021 में यह कार्य एनएच डिवीजन लखनऊ की ओर से मेसर्स महाकाल एजेंसी को दिया गया।
एजेंसी को यह कार्य एक साल में पूरा करना था, लेकिन अब तक पूरा नहीं हो पाया। रिंग रोड निर्माण की धीमी रफ्तार पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अफसरों को भी कई बार फटकार लगाई। इसके बावजूद तेजी नहीं आई। अधिकारियों का कहना है कि रिंग रोड पर रेलवे क्राॅसिंग पर ओवरब्रिज निर्माण की स्वीकृति नहीं मिल पा रही है। 12 साल से जिस धीमी गति से निर्माण हुआ है, उसने सवाल भी खड़े कर दिए है।
कई हाईवे को जोड़ता है रिंग रोड
करीब 17 किलोमीटर रिंग रोड रायबरेली-अयोध्या हाईवे, रायबरेली-सुल्तानपुर, रायबरेली-जौनपुर, रायबरेली-लखनऊ, रायबरेली-प्रयागराज से जोड़ेगा। रिंग रोड का एक सिरा लखनऊ रोड पर हरचंदपुर के निकट डिडौली से शुरू होगा, जो प्रयागराज हाईवे पर कुचरिया गांव के निकट मिला है। रिंग रोड का निर्माण पूरा नहीं होने से शहर के अंदर से लखनऊ-प्रयागराज हाईवे से निकलते हैं। इससे जाम की समस्या बनी रहती है।
रेलवे से नहीं मिल सकी अनुमति
रिंग रोड पर छोटे और बड़े मिलाकर 12 पुल बनने हैं। रेलवे लाइन के ऊपर के अलावा सभी पुलों का निर्माण पूरा हो गया है। कार्यदायी एजेंसी अब तक रेलवे से अनुमति समेत अन्य प्रक्रिया को पूरा नहीं करा पाई है। इस वजह से काम में रफ्तार नहीं आ रही है।
रिंग रोड का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। रेलवे लाइन के ऊपर पुल का निर्माण होना है। इसके लिए रेलवे से अनुमति समेत अन्य प्रक्रिया पूरी कराई जा रही हैं। जल्द रिंग रोड से आवागमन शुरू होगा।
-रजनीश कुमार, अधिशासी अभियंता एनएच लखनऊ