भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी 282 करोड़ की कनेक्टिंग चैंबर योजना
केस एक
सीतापुर रोड की शंकरजीपुरम कॉलोनी में जल निगम के ठेकेदारों ने कनेक्टिंग चैंबर बनाने को सड़क तो खोद दी, लेकिन इसे बनाने नहीं आए। इस कारण अब लोगाें का घर तक आना-जाना मुश्किल है।
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केस दो
इस्माइलगंज द्वितीय वार्ड की ज्यादातर रोड जल निगम के कनेक्टिंग चैंबर के काम के चलते खुदी पड़ी है। इससे करोड़ों की लागत से बनी सड़कें बर्बाद हो गईं और अब जल निगम वाले इन्हें ठीक भी नहीं कर रहे।
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केस तीन
इंदिरा प्रियदर्शिनी वार्ड में जल निगम ने कनेक्टिंग चैंबर के लिए जगह-जगह सड़क तो खोद दी, पर इसे ठीक नहीं किया। ऐेसे में अब बारिश में समस्या बढ़ गई है। कई जगह सीवर भी चोक हो गया है।
लखनऊ। भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी 282 करोड़ की कनेक्टिंग चैंबर योजना के ये उदाहरण तो बानगी भर हैं। बालागंज, त्रिवेणी नगर, इंदिरा प्रियदर्शिनी, जानकीपुरम और इस्माइलगंज वार्ड सहित शहर के वे सभी इलाके जहां कनेक्टिंग चैंबर बनाए जा रहे हैं, हालात बदतर हैं। जल निगम के ठेकेदार कनेक्टिंग चैंबर बनाने के बाद सड़कों को खोदकर छोड़ जा रहे हैं, जबकि सड़क बनाने का उन्हें बजट मिलता है। इसके अलावा चैंबर बनाने और घरों तक कनेक्शन देने का काम भी मानक अनुसार नहीं किया गया। इसे लेकर लगातार पार्षद शिकायत भी कर रहे हैं, पर सुनवाई नहीं हो रही है।
अमृत योजना में कनेक्टिंग चैंबर के काम में घपले का मामला पार्षद मुन्ना मिश्रा, रामकृ ष्ण यादव, पूर्व पार्षद रुद्र प्रताप, रामकुमार वर्मा एक साल से नगर निगम सदन में उठा रहे हैं, फिर भी काम नहीं सुधर रहा। दो सप्ताह पहले भी महापौर संयुक्ता भाटिया से शिकायत की। इसमें जल निगम के अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई, पर अब तक कुछ नहीं हुआ।
ऐसे कर रहे गोलमाल
एक कनेक्टिंग चैंबर बनाने के लिए ठेकेदारों को 28 हजार रुपये दिए जाते हैं। इस काम के लिए काटी जाने वाली सड़क को बनाने के लिए बजट में करीब साठ प्रतिशत पैसा होता है। इसके बावजूद साल-साल भर बाद भी सड़कें नहीं बनाई जा रही हैं। पार्षदों को इसे अपने बजट से बनवाना पड़ रहा है। पूर्व पार्षद रुद्र प्रताप सिंह का कहना है कि मैनहोल के ढक्कन भी घटिया लगाए जा रहे हैं। ये बार-बार टूट जा रहे हैं।
सीवर लाइन बिछाने में हो चुकी गड़बड़ी
जेएनएनयूआरएम के तहत डाली गई जिस 1100 किमी सीवर लाइन को चालू करने के लिए कनेक्टिंग चैंबर बनाए जा रहे हैं, वह काम भी जल निगम ने ही किया है। सीवर लाइन बिछाने में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई। तमाम जगह ब्रांच सीवर लाइनों को मेन ट्रंक लाइन से जोड़ा ही नहीं गया। इस कारण कई जगह समस्या आई। अब इसी तरह का घटिया काम कनेक्टिंग चैंबर बनाने में किया जा रहा है।
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...तो फ्लॉप ही न हो जाए योजना
जिस तरह से जल निगम के ठेकेदार और इंजीनियर काम करा रहे हैं, उससे तो कनेक्टिंग चैंबर की पूरी योजना ही फ्लॉप हो जाएगी। न तो कनेक्टिंग चैंबर ठीक से बनाए जा रहे हैं और न सीवर का कनेक्शन सही से किया जा रहा है। पार्षद समीर पाल सोनू व पूर्व पार्षद रुद्र प्रताप सिंह कहते हैं कि कई बार शिकायत पर इंजीनियर आते हैं और खानापूरी कर चले जाते हैं।
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पैसा बचाने को ठेकेदार कर रहे गड़बड़ी
जानकारों का कहना है कि ठेकेदार पैसा बचाने के लिए ठीक से काम नहीं कर रहे। कनेक्टिंग चैंबर बनाकर उसका कनेक्शन पाइप जमीन के नीचे से घर तक पहुंचाया जाना चाहिए, जबकि ठेकेदार कई जगह नाली के ऊपर से ही कनेक्शन कर रहे हैं। इसे लेकर इस्माइलगंज के पार्षद शिकायत भी कर चुके हैं। इसके बाद भी कुछ जगह ही कनेक्शन ठीक किए गए। चैंबर बनाने में भी सही निर्माण सामग्री का प्रयोग नहीं हो रहा है।
फैक्ट फाइल
95 हजार कनेक्टिंग चैंबर बनने हैं शहर में
75 हजार के करीब चैंबर अब तक बन पाए
1100 किमी सीवर लाइन बिछी जेएनएनयूआरएम योजना में
जांच कराई जाएगी
कनेक्टिंग चैंबर बनाने के काम में हो रही गड़बड़ी की जांच कराकर इसे ठीक कराया जाएगा। जहां सड़क खोदी गई है उसे बनवाया जाएगा। इसके लिए जो जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
विकास गोठलवाल, प्रबंध निदेशक, जल निगम