सपा द्वारा विधान परिषद के लिए आठ प्रत्याशियों की घोषणा के बाद सियासी गलियारों में यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि शायद अब कांग्रेस अपना प्रत्याशी न उतारे।
कांग्रेस के साथ मिलीभगत का ही परिणाम सपा का आठवां प्रत्याशी हो सकता है। इस चर्चा को इसलिए भी बल मिल रहा है क्योंकि कांग्रेस इससे पहले दो बार राज्यसभा में सपा के समर्थन से अपने प्रत्याशी पहुंचा चुकी है।
कांग्रेस के पास 28 विधायक हैं। उसे एक सीट जीतने के लिए पांच विधायकों का समर्थन और चाहिए। यूं तो रालोद के आठ विधायक हैं। कांग्रेस व रालोद मिलाकर इनकी संख्या 36 हो जाती है लेकिन पिछले कुछ समय से कांग्रेस व रालोद के बीच संबंध उतने मधुर नहीं रहे।
इससे पहले दो बार राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने जब अपने प्रत्याशी उतारे तो उसमें रालोद से कोई राय-मशविरा नहीं किया। दोनों ही बार कांग्रेस ने सपा का समर्थन लिया। इससे पहले जब कांग्रेस ने प्रमोद तिवारी को राज्यसभा के लिए खड़ा किया तो उस समय सपा ने समर्थन दिया।