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प्रदेश कांग्रेस कमेटी पर गिरी हार की गाज, होगी भंग

Fri, 30 May 2014 01:30 AM IST
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार की पहली गाज प्रदेश कांग्रेस कमेटी पर गिरने जा रही है। शीघ्र ही प्रदेश की कांग्रेस कमेटी भंग कर दी जाएगी।
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खुद यूपी प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री ने गुरुवार को हार की समीक्षा करने के बाद स्वीकार किया कि यूपी के संगठन में बदलाव करने की जरूरत है।

इसके लिए वे राष्ट्रीय अध्यक्ष से प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भंग करने की सिफारिश करेंगे। इसके बाद नए सिरे से कमेटी गठित की जाएगी।

ली हार की जिम्मेदारी

मिस्त्री ने कहा कि प्रभारी होने के नाते वे हार की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में उन्हें मात्र 10 महीने ही काम करने का अवसर मिला। बाद में उन्हें चुनाव लड़ने वड़ोदरा भेज दिया गया।

उन्होंने कहा कि कम समय के बावजूद उन्होंने काफी प्रयास किए लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं आ पाए।

मिस्त्री ने कहा कि कांग्रेस अपनी गलतियों को खोजने की कोशिश में लगी हुई है। इसमें अभी कुछ समय और लगेगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि राहुल गांधी व सोनिया गांधी ने हार की जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है।

इसके बाद यह कहना कि राहुल चुनाव में फेल हो गए, उचित नहीं है। कांग्रेस ने हार की सामूहिक जिम्मेदारी ले ली है।

वड़ोदरा से नहीं लड़ूंगा उपचुनाव

मिस्त्री से जब पूछा गया कि नरेंद्र मोदी वड़ोदरा सीट छोड़ रहे हैं, ऐसे में वे क्या दोबारा वहां से चुनाव लड़ेंगे ? इस पर उन्होंने कहा कि वे अब लोकसभा उपचुनाव नहीं लड़ेंगे।

वे राज्यसभा सांसद हैं और वही रहेंगे। उन्होंने कहा कि मोदी ने यूपी की जनता से जो वादे किए हैं, उन्हें वे पूरा भी करें।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश में पार्टी के जनाधार को मजबूत बनाए रखने के लिए वडोदरा सीट छोड़ दी, जिसका मतलब साफ है कि वह वाराणसी का प्रतिनिधित्व करते रहेंगे। अब वडोदरा में फिर से चुनाव होना है।

कांग्रेस ने शुरू की हार की समीक्षा

कांग्रेस ने गुरुवार को अवध व पूर्वांचल के प्रत्याशियों को हार की समीक्षा के लिए लखनऊ बुलाया था। कुल 23 में से 19 प्रत्याशी इसमें शामिल हुए।

एक-एक करके उनसे हार के कारण पूछे गए। इस दौरान प्रदेश प्रभारी मिस्त्री के अलावा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री, प्रकाश जोशी व नसीब पठान भी उपस्थित थे।

कांग्रेस ने प्रदेश को तीन क्षेत्रों में बांटकर समीक्षा शुरू की है। शुक्रवार को दिल्ली में प्रदेश के पूर्व सांसदों व चुनाव में नंबर दो पर रहे प्रत्याशियों को बुलाया गया है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश व बुंदेलखंड के प्रत्याशियों को तीन जून को समीक्षा के लिए दिल्ली बुलाया गया है।
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ये हैं कांग्रेस की हार के कारण

-प्रत्याशियों के नाम की घोषणा में देरी
-भाजपा के मुकाबले धीमा प्रचार अभियान

-चुनाव में तेजी से हुआ ध्रुवीकरण, जिसे पार्टी समझ नहीं पाई
-ध्रुवीकरण के कारण यूपीए की उपलब्धियां दब गईं

-संगठन का ठीक ढंग से काम न करना
-लोकल फैक्टर ने भी किया विरोध में काम
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