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न मुसलमानों को जोड़ सके, कांग्रेसियों को एकजुट कर सके गुलाम नबी, हट सकते हैं राजबब्बर भी

Wed, 23 Jan 2019 10:53 PM IST
Anupam Prasun न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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कांग्रेस ने यूपी के पार्टी प्रभारी गुलाम नबी आजाद को प्रदेश से हरियाणा के लिए रवाना कर दिया। वह यहां न तो मुसलमानों पर कोई खास छाप छोड़ पाए और न ही आम कार्यकर्ताओं ने उनके साथ सहज अनुभव किया। वह ‘बाहरी’ की तरह यूपी में आते थे और कुछ घंटे रुककर दिल्ली रवाना हो जाते थे। 
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कांग्रेस सूत्रों की मानें तो अगला नंबर प्रदेश अध्यक्ष का हो सकता है। उनके स्थान पर राज्यसभा सांसद पीएल पुनिया को जिम्मेदारी दी जा सकती है। छत्तीसगढ़ में पुनिया ने अपनी क्षमता का परिचय दिया है। 

आम कांग्रेसी की शिकायत रहती थी कि गुलाम नबी अक्सर सिर्फ कार्यक्रमों में ही दिखते हैं, जिससे कार्यकर्ता और यहां तक कि प्रदेश नेतृत्व में शामिल अधिकांश नेता भी अपने मन की बात उनसे नहीं कर पाते थे। 
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पार्टी हाईकमान ने सोचा था कि गुलाम नबी आजाद के आने से यूपी में मुसलमान कांग्रेस की तरफ आकर्षित होगा, पर परिणाम आशा के अनुरूप नहीं रहे। विभिन्न कमेटियों में तो मुस्लिम नेताओं को तरजीह दी गई, पर मुस्लिम जनता में कांग्रेस अपेक्षित पैठ नहीं बना पाई।
 

पुनिया को मिल सकती है कमान

पार्टी सूत्रों का कहना है कि हाईकमान ने राजबब्बर को भी हटाने का मन बना लिया है। उनके स्थान पर राज्यसभा सांसद पीएल पुनिया को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। पुनिया अनुसूचित जाति से हैं। 

हाईकमान का मानना है कि इससे कांग्रेस को इस वर्ग को भी अपने से जोड़ने में मदद मिलेगी। यहां बता दें कि 80 के दशक तक अनुसूचित जाति के मतदाता कांग्रेस का ही परंपरागत वोट बैंक थे। 

90 के दशक में कांग्रेस और बसपा के गठजोड़ के बाद यह वर्ग कांग्रेस से अलग होकर बसपा के साथ चला गया। तब से कांग्रेस की हालत भी यूपी में पतली हो गई। लाख कोशिशों के बावजूद इसमें सुधार नहीं हुआ। पुनिया के तौर पर कांग्रेस को एक आशा की किरण दिख रही है।
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प्रियंका के आने से पिछड़ा वर्ग भी जुड़ेगा : सैनी

कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग के यूपी प्रभारी अनिल सैनी ने कहा कि प्रियंका गांधी वाड्रा को पूर्वी यूपी का प्रभारी बनाए जाने से पूरे प्रदेश पर सकारात्मक असर पड़ेगा। अभी तक कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदेश में खुद को असहाय महसूस कर रहे थे, प्रियंका के आने से उनमें नई ऊर्जा का संचाल हुआ है। पिछड़ा वर्ग भी कांग्रेस की ओर अधिकाधिक आकर्षित होगा।
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