कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के तौर पर बेहद छोटी और युवा टीम दी है। पिछली बार जहां पीसीसी में 500 सदस्य थे, इस बार सिर्फ 41 सदस्य ही रखे गए हैं। पीसीसी सदस्यों की औसत आयु 40 वर्ष है। कमोबेश सभी वरिष्ठ नेता पीसीसी से बाहर सलाहकार मंडल में हैं।
इसके चलते जनाधार बढ़ाने के लिए पुराने नेताओं से सामंजस्य स्थापित करना भी बड़ी चुनौती होगी। जातिगत समीकरण के लिहाज से देखें तो नई प्रदेश कांग्रेस कमेटी में पिछड़ों, दलित और मुस्लिम नेताओं को तरजीह दी गई है। पिछड़ों को जहां 45 प्रतिशत, वहीं दलितों व मुसलमानों को क्रमश: 20 प्रतिशत और 15 प्रतिशत प्रतिनिधित्व दिया गया है।
नए प्रदेश अध्यक्ष लल्लू के सामने सबसे बड़ी चुनौती वरिष्ठ चेहरों को साथ बनाए रखने की होगी। युवा पदाधिकारियों पर अक्सर यह आरोप लगते हैं कि वे वरिष्ठ नेताओं को नजरअंदाज कर देते हैं। चूंकि पीसीसी के अधिकतर युवा नेताओं के पास अपना बेस नहीं है, इसलिए वे इस मामले में वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का काफी फायदा उठा सकते हैं।