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आंदोलनकारी बिजलीकर्मियों व प्रबंधन में टकराव बढ़ा, सीएम से हस्तक्षेप की अपील

Sat, 03 Oct 2020 03:08 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम केे निजीकरण के प्रस्ताव पर शासन व बिजलीकर्मियों में टकराव बढ़ गया है। बिजली कर्मियों के 5 अक्तूबर से प्रस्तावित कार्य बहिष्कार पर शासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए उपकेंद्रों व संवेदनशील संस्थानों पर पावर ग्रिड के अभियंताओं व प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती का आदेश दिया है।

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उधर, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन पर टकराव पैदा करने और हड़ताल थोपने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की अपील की है। संघर्ष समिति ने निजीकरण का प्रस्ताव रद्द करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि अगर किसी कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया तो अनिश्चितकालीन हड़ताल और जेल भरो आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।

समिति के पदाधिकारियों शैलेंद्र दुबे, प्रभात सिंह, एके सिंह, जीवी पटेल, गिरीश पांडेय व सदरुद्दीन राना व अन्य ने कहा कि मांग को लेकर 1 सितंबर से शांतिपूर्ण आंदोलन चल रहा है, लेकिन प्रबंधन ने कोई वार्ता तक नहीं की। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि 5 अक्तूबर को पूर्ण कार्य बहिष्कार के दौरान ग्रिड फेल न हो व आम नागरिकों को तकलीफ न हो इसके मद्देनजर बिजली उत्पादन गृहों, 765/400 केवी ट्रांसमिशन विद्युत उपकेंद्रों और प्रणाली नियंत्रण में काम करने वाले कर्मचारियों को कार्य बहिष्कार से अलग रखा गया है। लेकिन पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन इसे हड़ताल बता कर प्रदेश सरकार को गुमराह कर अनावश्यक टकराव पैदा कर रहा है। 

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प्रबंधन का आदेश असंविधानिक

संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन और पीसीएस अधिकारियों को बिजलीघरों और संस्थानों का चार्ज देने का आदेश कर दिया है जो पूरी तरह असंविधानिक है। समिति ने चेतावनी दी है कि शांतिपूर्ण कार्यरत बिजली कर्मचारियों का चार्ज यदि बाहरी एजेंसियों और प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपने की कोशिश हुई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। इसकी सारी जिम्मेदारी पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन की होगी।
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