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कपाल भाति से मांसपेशियां होंगी मजबूत

Thu, 30 Oct 2014 12:10 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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संजय गांधी पीजीआई में शुक्रवार से शुरू एसोसिएशन ऑफ कोलन एंड रेक्टल सर्जन की 37 वीं कॉन्फ्रेंस में जब गैस्ट्रो सर्जन प्रो. आनंद प्रकाश ने जब यह कहा कि मांसपेशियों की मजबूती के लिए कपालभाति काफी मददगार साबित हो सकता है।
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उन्होंने कहा कि मलद्वार से मांसपेशियां बाहर लटकने की बीमारी (रेक्टम प्रोलेप्स ) से बचने के लिए कपालभांति योग करना चाहिए।

श्रुति प्रेक्षागृह में आयोजित कॉन्फ्रेंस में प्रो. आनंद प्रकाश ने कहा कि रेक्टम प्रोलेप्स बच्चों, महिलाओं और बूढ़ों में ज्यादा होती हैं।

बच्चों में कुपोषण के कारण रेक्टम को सहारा देने वाली मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। कब्ज होने पर जब बच्चा ताकत लगाकर मलत्याग करता है तो ये मांसपेशियां बाहर आ जाती हैं।

महिलाओं में प्रसव के बाद ये दिक्कत होती हैं जबकि वृद्धों में अधिक उम्र होने, खांसी, दमा और प्रोस्टेट ग्रंथि के कारण मांसपेशिया कमजोर होकर बाहर आ जाती हैं।
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उन्होंने बताया कि इस बीमारी के हो जाने पर सर्जरी से ही मांसपेशियों को ठीक किया जाता है। अब लैप्रोस्कोपी तकनीक से आंतों को सही कर दिया जाता है। मरीज को एक ही दिन में छुट्टी दे दी जाती है।

प्रो. अशोक कुमार ने बताया कि 18 साल के एक युवक को पाइल्स (बवासीर) की दिक्कत थी। उसने एक झोलाछाप का विज्ञापन पढ़ा और उसके पास पहुंच गया।

डॉक्टर ने एक टीके में पाइल्स खत्म करने का दावा किया लेकिन इंजेक्शन लगवाने के बाद उसकी दिक्कत और भी बढ़ गई।

जांच में पता चला कि इंजेक्शन लगाने के कारण आंत सूखकर खराब हो गई थी। बाद में उसकी आंत को काटकर निकालना पड़ा।

बताया कि टीके के नाम पर झोलाछाप ऐसे एसिड आंत के अंदर लगा देते हैं जो फिसर, पाइल्स या फिस्चुला को खत्म तो नहीं करता बल्कि पूरी आंत को ही जला देता है। ऐसे मरीजों को कैंसर न होने के बावजूद उनकी आंत काटनी पड़ती है।
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