गर्मी में स्लीपर से लेकर एसी बोगियों तक यात्रियों से भरी हुई हैं। आलम यह है कि पैसेंजर पसीने से तरबतर होकर सफर करने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी के चलते ट्रेन में मुसाफिरों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं।
गोविंद प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पर शिकायत दर्ज कराई है कि बेगमपुरा एक्सप्रेस (12237) की स्लीपर बोगी एस-10 में वह परिजन संग यात्रा कर रहे थे। स्लीपर कोच में अनधिकृत रूप से यात्रियों की भीड़ थी, जिससे घुटन पैदा हो रही थी। उनके साथ 13 साल का बच्चा भी था, जिसकी हालत खराब हो गई। इतना ही नहीं उन्होंने बताया कि जिस वर्थ पर वे बैठे थे, उसके सामने की सीट पर एक व्यक्ति का शव रखा था।
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ट्रेन लखनऊ से गुजर गई, यात्रियों को शव के बीच मजबूरन सफर करना पड़ा। हालांकि, अफसरों का कहना है कि ट्रेन में शव की सूचना यात्रियों ने जीआरपी को नहीं दी। इसके अतिरिक्त लखनऊ मेल के स्लीपर कोच में यात्रा कर रहे निखिल गुप्ता ने डीआरएम से शिकायत की कि बोगी में जनरल यात्रियों ने कब्जा कर रखा था। दून एक्सप्रेस की थर्ड एसी बोगी बी-1 के यात्री शिवांश पांडेय ने डीआरएम को जनरल यात्रियों से भरी बोगी का वीडियो भेजकर सवाल किया कि रिजर्वेशन करवाकर सफर करने वालों की सुविधाएं हाशिए पर क्यों?
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लेटलतीफी से बढ़ीं मुश्किलें : भीषण गर्मी में ट्रेनों की लेटलतीफी से मुश्किलें और भी बढ़ गई। राजगीर से उधमपुर तक जाने वाली 03221 स्पेशल ट्रेन को चारबाग में सोमवार रात 12:05 बजे पहुंचना था, लेकिन यह ट्रेन मंगलबार दोपहर पौने बारह बजे पहुंची। 12 घंटे की देरी से पहुंचने पर यात्रियों का हाल-बेहाल हो गया। यात्री राजीव कुमार झा ने बताया कि अयोध्या स्टेशन पर यात्रियों को मदद मिली। डिहाइड्रेशन से निपटने के लिए ओआरएस घोल दिया गया।
उत्तर रेलवे के सीनियर डीसीएम कुलदीप तिवारी का कहना है कि यात्री सुविधाओं पर काम हो रहे हैं। ट्रेनों की एसी कूलिंग बनाए रखने के लिए नियमित मेंटेनेंस हो रही है। यात्रियों की शिकायतों का त्वरित निस्तारण कराया जा रहा है।