कोई घर पहुंचने से पहले ही लड़खड़ाकर गिर पड़ा। कोई खाना खाकर चारपाई पर लेटा तो उठा ही नहीं। कई रातभर उल्टियां करते रहे। तमाम ऐसे थे जिन्हें आंखों से दिखना बंद हो गया। हाथ-पैरों ने जवाब दे दिया।
जहरीली शराब ने पीने के चार घंटे बाद ही अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था। खड़ता गांव के कौशल बोले, ‘थाना पुलिस का सूचना दिया राहै पर कऊनौ आवा नाहीं।’ रात को पुलिस ने शायद ही सोचा होगा कि जहरीली शराब का मामला इतना गंभीर रूप ले लेगा।
रविवार आधी रात से ही उल्टियां कर रहे खड़ता गांव के सिद्धेश्वर को सोमवार तड़के दिखना बंद हो गया। उल्टियां करके वह बेदम हो चुका था। घबराई पत्नी सिद्धेश्वरी गांववालों की मदद से उसे अस्पताल ले गईं जहां कुछ देर उपचार के बाद उसने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने पूछताछ की तब जहरीली शराब की तरफ ध्यान गया।
अभी सिद्धेश्वर का परिवार संभल भी नहीं पाया था कि घर पर उल्टियां करते-करते बड़े भाई मंगल प्रसाद ने भी दम तोड़ दिया। इसके बाद तो परिवार में कोहराम मच गया। बच्चे एक-दूसरे से चिपट कर रोने लगे।
एक घंटे बाद करीब साढ़े सात बजे पास ही स्थित रामपुर बस्ती गांव के कृष्णपाल सिंह के बेटे रमेश ने रजाई खींची तो मुंह से झाग निकलते देख उसके होश उड़ गए। रमेश बोला, ‘बाबा रात मां खाना खाय के सोये राहैं। फिर नाय उठै।’
आती रहीं मौत की खबर
सूचना आई कि पहाड़पुर गांव के देशराज गांव के किनारे पड़े मिले हैं। सांस नहीं चल रही है। गांव के लोग दौड़े और शव उठाकर घर लाए। तब तक जहरीली शराब से मौत की खबर जंगल में आग की तरह फैल चुकी थी और पुलिस-प्रशासन की टीम गांव आ गई थी। यह भी पता चला कि जगनू और गटरू घर से भाग चुके हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।
देशराज के परिवार के लोग इतने घबरा गए कि आनन-फानन में उन्होंने शव का अंतिम संस्कार भी कर डाला। इस बीच मौतों की खबर आती रही। कभी दतली, कभी खड़ता, कभी रामपुर बस्ती और अटौरा तो कभी उन्नाव के पूरनखेड़ा से। दोपहर में सरोजनीनगर के मैनेजरखेड़ा गांव से मौतों की खबर आ गई। प्रताप पासी ने रविवार रात 11 बजे ही दम तोड़ दिया था।
सोमवार दोपहर अफसर उसके घर पहुंचे तो घबराए परिवारवालों ने शराब से मौत की बात से ही इन्कार कर दिया। परिवारीजनों ने अफसरों को विश्वास दिलाने के लिए किडनी की बीमारी के कागजात दिखाए।
उधर, दतली गांव में मौजूद पुलिस-प्रशासन के अफसरों ने सिविल, बलरामपुर सहित सभी अस्पतालों से 108 और 102 एंबुलेंस बुलवा लीं। बीमारों को सीएचसी मोहनलालगंज भेजा गया जहां से प्राथमिक उपचार की खानापूरी के बाद उन्हें ट्रॉमा सेंटर रेफर किया जाता रहा।
भाइयों ने साथ पी, दोनों चले गए
सरोजनीनगर के मैनेजरखेड़ा निवासी मजदूरी करने वाले नंदकिशोर और श्रीपाल रविवार रात करीब आठ बजे घर लौटे और बिना खाना खाए सो गए। आधा घंटे बाद ही दोनों के पेट उमड़ने-घुमड़ने लगे। उल्टियां शुरू हो गईं।
नंदकिशोर को दस्त भी आने लगे। परिवार के लोग बिजनौर के एक निजी अस्पताल ले गए जहां से उसे लोकबंधु रेफर कर दिया गया। यहां देर रात नंदकिशोर की मौत हो गई। सोमवार सुबह श्रीपाल ने भी दम तोड़ दिया।
इसी तरह मोहनलालगंज के खड़का निवासी सिद्धेश्वर और उसके बड़े भाई मंगल प्रसाद की मौत से पूरे गांव में कोहराम मचा रहा। दोनों का भरा-पूरा परिवार है। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों भाई अक्सर साथ ही पीते थे।