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यूपी में गठबंधन से कहीं की नहीं रही कांग्रेस, अपने ही बढ़ा रहे हैं मुश्किल

Mon, 13 Mar 2017 10:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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अखिलेश यादव व राहुल गांधी
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सपा से गठबंधन के बावजूद चुनाव में कांग्रेस की दुर्दशा से अब उसकी हालत न घर की, न घाट की वाली हो गई है। पार्टी के खराब प्रदर्शन ने नाराज चल रहे कांग्रेसियों को भी विरोध की हवा दे दी है।
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पार्टी को सपा के साथ जाने का कोई फायदा नहीं मिला। अब स्थिति यह है कि शुरू से ही गठबंधन के खिलाफ रहे नेताओं को खुलकर मुखालफत करने का मौका मिल गया है।

कांग्रेस ने सपा के साथ चुनाव के ऐन मौके पर समझौता किया था। गठबंधन के तहत कांग्रेस को 403 में से 114 सीटें ही मिलीं। बहुत सी सीटें कांग्रेस को छोड़नी पड़ी। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान उन नेताओं का हुआ जो चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे लेकिन ऐन वक्त पर उनकी सीट सपा के खाते में चली गई। ऐसे नेता इस गठबंधन के सबसे ज्यादा खिलाफ थे।
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इनके अलावा पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी शुरू से ही इस गठबंधन के खिलाफ थे। वे दबी जुबान से कहते थे कि सपा के साथ जाने से पार्टी को नुकसान होगा।

सपा की पांच साल की सरकार के खिलाफ एंटी इन्कमबेंसी के कारण लोगों में जो गुस्सा है उसका शिकार कांग्रेस को भी होना पड़ेगा। लेकिन उस समय पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने किसी की बात न सुनी और सपा के साथ समझौता कर लिया।
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प्रशान्त किशोर पर भी फूटेगा नेताओं का गुस्सा

प्रशांत किशोर
पार्टी ने जब चुनाव रणनीतिकार प्रशान्त किशोर को यूपी में लगाया तो यहां के कई नेता नाराज थे। इसका मुख्य कारण प्रशान्त किशोर की कार्यप्रणाली थी।

वे जिस तरह से संगठन के वरिष्ठ नेताओं को मीटिंग में ऑर्डर देते थे वह नेताओं को रास नहीं आता था। पीके ही नहीं उनकी टीम के लोग भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को आदेश देते थे।

पीके ने उन वरिष्ठ नेताओं को जो 2014 का लोकसभा चुनाव हार गए थे, विधानसभा चुनाव लड़ने को कहा। यह बात पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को नहीं पची। इसका भी विरोध हुआ लेकिन पीके की राहुल गांधी से नजदीकियों के कारण मामला ज्यादा आगे नहीं बढ़ सका।

पीके की इसी रणनीति के तहत पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद को शाहजहांपुर की तिलहर सीट से चुनाव लड़ना पड़ा। हालांकि, वे भी मोदी की सुनामी में बुरी तरह हार गए। कुल मिलाकर पीके की सारी रणनीति यूपी में फेल हो गई। ऐसे में उनके खिलाफ जल्द ही पार्टी नेताओं का गुस्सा फूटेगा।
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पीके ने ही बुना था गठबंधन का ताना-बाना

प्रशांत किशोर व राहुल गांधी - फोटो : amar ujala
पीके बिहार की तर्ज पर यूपी में भी गठबंधन का ताना-बाना बुन रहे थे। इसी के तहत उन्होंने सपा व कांग्रेस का गठबंधन कराया।

इसमें वे बसपा को भी चाहते थे लेकिन सफल नहीं हो सके। हालांकि प्रदेश कांग्रेस के नेता शुरू से ही सपा के साथ गठबंधन के खिलाफ रहे।

पार्टी नेताओं का कहना था कि 1996 में  कांग्रेस ने बसपा के साथ जो गठबंधन किया उसी नाते पार्टी की हालत इतनी खराब हुई है। अब दूसरी बार पार्टी चूक करने जा रही है। लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने यह बात नहीं मानी।
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