इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक जनहित याचिका पर राज्य सरकार को दुधवा नेशनल पार्क और इटावा लायन सफारी के वन्यजीवों की हिफाजत के लिए नियम बनाने की प्रक्रिया तीन हफ्ते में पूरी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी, इसमें नाकाम होने पर प्रदेश के प्रमुख सचिव वन और दुधवा नेशनल पार्क के फील्ड निदेशक को अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट में पेश होकर बताना होगा कि आदेश के साढ़े तीन साल बाद भी नियम क्यों नहीं बनाए गए। न्यायमूर्ति पीके जायसवाल और न्यायमूर्ति आलोक माथुर की खंडपीठ ने यह आदेश वकील एसके मिश्र की याचिका पर दिया।
वर्ष 2015 में दाखिल याचिका में दोनों वन्यक्षेत्रों से गुजरने वाली रेलवे लाइनों से कट करने वाले वन्यजीवों की हिफाजत किए जाने का अनुरोध किया गया है। साथ ही, दुधवा टाइगर रिजर्व में शेरों की सुरक्षा के लिए स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स बनाने का आग्रह भी किया गया है। कोर्ट ने इस मामले में नियम बनाने को लेकर राज्य सरकार से कई बार जवाब तलब कर चुकी है।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड निदेशक संजय सिंह ने कोर्ट को बताया था कि 12 फरवरी 2013 की अधिसूचना के जरिये स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स बनाया जा चुका है। इसकी सेवा संबंधी नियम बनाने की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि अभी तक नियम नहीं बन पाए हैं। उन्होंने कहा था कि विभिन्न विभागों ने तकनीकी आपत्तियां जताई थी। इनके समाधान के बाद अधिसूचना जारी की जाएगी।
बीते मंगलवार को सुनवाई के समय सरकारी वकील ने नियम बनाने की प्रक्रिया पूरी करने को एक माह का और समय देने का आग्रह किया। इस पर कोर्ट ने कहा, यह मामला वर्ष 2015 से लंबित है। इसलिए एक माह का समय नहीं दिया जा सकता है। हालांकि कोर्ट ने नियम बनने की प्रक्रिया पूरी करने को तीन हफ्ते का और समय दे दिया। साथ ही अगली सुनवाई 7 जनवरी 2020 को नियत की है।