लखनऊ। पद्मश्री और माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली दिव्यांग पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा के खिलाफ धोखाधड़ी का परिवाद न्यायिक मजिस्ट्रेट शैलेश कुमार सिंह ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रस्तुत तथ्यों और उपलब्ध अभिलेखों से आरोपी के खिलाफ कार्रवाई का पर्याप्त आधार नहीं बनता।
परिवादी ओम प्रकाश ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2015 में अरुणिमा को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का बैंक खाता चलाने का अधिकार मिला था। उन्होंने बिना जानकारी के खाते से 75 लाख रुपये निकाले और फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल किए। कोर्ट ने परिवाद दर्ज कर ओम प्रकाश को बयान दर्ज कराने का आदेश दिया। परिवादी के बयान और अभिलेखों से स्पष्ट हुआ कि अरुणिमा को बोर्ड निर्णय से एकल हस्ताक्षर का अधिकार था। ऐसे में उन्हें धन निकासी का अधिकार भी प्राप्त था। अदालत ने माना कि आरोप प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्यों से पुष्ट नहीं होते। इसलिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 203 के तहत परिवाद निरस्त किया गया।
कोर्ट के आदेश के बाद अरुणिमा सिन्हा ने कहा कि परिवाद असत्य तथ्यों और भ्रामक आरोपों पर आधारित था। विपक्षियों ने उनके खिलाफ सोची समझी साजिश के तहत यह कृत्य किया था, जिसका पर्दाफाश हो चुका है।