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लविवि की पदक सूची पर सवाल, राजभवन पहुंचा मामला

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लविवि की पदक सूची पर सवाल, राजभवन पहुंचा मामला
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एमकॉम की छात्रा ने राजभवन भेजी शिकायत, छात्रा का दावा उससे कम नंबर पाने वाली छात्रा को दिए जा रहे चार पदक
लखनऊ विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह में पदक पाने वाले वाले मेधावियों की अंतिम सूची जारी होने के बाद एक छात्रा ने भेदभाव का आरोप लगाया है। छात्रा का आरोप है कि एमकॉम में उसके सबसे ज्यादा नंबर हैं। इसके बावजूद उसे सिर्फ एक ही पदक दिया जा रहा है और फाइनल सूची में दूसरे नंबर पर आने वाली छात्रा के नाम चार पदक हैं। छात्रा ने प्रस्तावित सूची पर आपत्ति भी जताई थी, इसके बावजूद इसमें बदलाव नहीं हुआ। वहीं लविवि प्रशासन ने नियमों के अनुसार ही पदक देने की बात कही है।
एमकॉम अप्लाइड इकोनॉमिक्स की छात्रा प्रिया टंडन के अनुसार उसके एमकॉम में सर्वाधिक 75.52 फीसदी नंबर हैं। इसलिए विवि के दीक्षांत समारोह में दिए जाने वाले कैलाश नाथ भार्गव गोल्ड मेडल, लाला शंकर सहाय-हर सहाय गोल्ड मेडल, डॉ. ओपी गुप्ता गोल्ड मेडल, मि.एंड मिसेज एनएन विद्यार्थी गोल्ड मेडल और बी गिरवर लाल वार्ष्णेय गोल्ड मेडल उसे मिलने चाहिए। मगर विवि ने अपनी सूची में सिर्फ डॉ. ओपी गुप्ता गोल्ड मेडल ही उसे दिया जाना प्रदर्शित किया है। छात्रा ने इसके लिए राजभवन को पत्र भेजकर शिकायत दर्ज कराई है।
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...तो अब तक गलत तरीके से दिए जाते रहे पदक
छात्रा का कहना है कि लविवि में पिछले कई साल से एमकॉम अप्लाइड इकोनॉमिक्स के टॉपर को ही सभी पदक मिलते रहे हैं। इस साल विवि प्रशासन कह रहा है कि एमकॉम के टॉपर के लिए चार और एमकॉम अप्लाइड इकोनॉमिक्स के टॉपर को एक मेडल मिलना है। छात्रा ने अपने शिकायती पत्र के साथ पिछले वर्षों की पदक सूची भी भेजी है। उस सूची में एमकॉम अप्लाइड इकोनॉमिक्स के टॉपर को ही पांचों पदक दिए गए हैं।
इनकम टैक्स के पेपर के लिए निर्धारित मेडल पर भी आपत्ति
अंतिम सूची तैयार होने के बाद गुरु नानक गर्ल्स कॉलेज की एक अन्य छात्रा ने भी आपत्ति दर्ज कराई है। छात्रा का कहना है कि इनकम टैक्स के पेपर में उसके सबसे ज्यादा नंबर हैं। इसके बावजूद सूची में किसी अन्य का नाम है। वह शहर से बाहर थी, इसलिए उसे प्रस्तावित सूची की जानकारी नहीं मिली। बहरहाल विवि प्रशासन ने उसकी शिकायत ले ली है, लेकिन इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।
इंप्रेस विक्टोरिया मेडल पर भी था विवाद
लविवि में संस्कृत विभाग में दिए जाने वाले इंप्रेस विक्टोरिया मेडल पर भी विवाद खड़ा हुआ था। यह मेडल उस समय का है जब लविवि अस्तित्व में नहीं था और इसका नाम कैनिंग कॉलेज हुआ करता था। इसके ऑर्डिनेंस के अनुसार संस्कृत में सबसे ज्यादा नंबर लाने वाले कैनिंग कॉलेज के विद्यार्थी को यह पदक दिया जाएगा। इस पर बीएसएनवी के छात्र ने आपत्ति दर्ज कराई थी। छात्र का कहना था कि उसे ज्यादा नंबर होने के बावजूद लविवि परिसर के विद्यार्थी को यह पदक दिया गया। वहीं लविवि प्रशासन का तर्क था कि कैनिंग कॉलेज लविवि परिसर का नाम था, इसलिए यह पदक किसी कॉलेज के विद्यार्थी को नहीं दिया जा सकता।
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जरूरी नहीं पुरानी गलती दोहराई जाए
पूर्व में अगर गलत पदक दिए गए होंगे तो यह जरूरी नहीं है कि गलती दोहराई जाए। नियमों को देखने के बाद ही सूची जारी की गई है। अगर राजभवन इस पर सवाल करेगा तो जो भी सही तथ्य हैं, उनकी जानकारी दी जाएगी।
- प्रो. एनके पांडेय,
प्रवक्ता, लविवि
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