चारबाग स्टेशन पर शुक्रवार को छापेमारी के दौरान फॉर्म 38 दिखा कर छोड़े गए सामान के असल मालिक व दलाल की तलाश इसी फॉर्म के जरिए की जाएगी।
जांच में फंसने वाले के खिलाफ वाणिज्य कर विभाग कड़ी कार्रवाई करेगा। शुक्रवार को वाणिज्य कर एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों की टीम ने संयुक्त रूप से चारबाग एवं लखनऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन के पार्सल घर पर छापा मारा था।
इस दौरान टैक्स चोरी से आए 140 सामान के नग को सीज किया गया। 270 बोरी सुपारी, 70-80 बोरा मखाना एवं ऑटो पार्ट्स को व्यापारियों के विरोध पर चार घंटे बाद फॉर्म 38 दिखाने पर छोड़ दिया गया था।
इस सामान की कीमत लाखों रुपए आंकी गई है। व्यापारियों के दबाव में जांच दल ने स्टेशन पर सामान तो छोड़ दिया लेकिन फॉर्म 38 के जरिए अब सुपारी,मखाना एवं ऑटो पार्ट्स के असल मालिक यानी व्यापारी की खोज सोमवार से शुरू होगी।
दरअसल छापे के दौरान इस सामान के असल मालिक सामने नहीं आए थे, बल्कि दलालों के माध्यम से फॉर्म 38 पेश किया गया था।
जाइंट कमिश्नर प्रदीप कुमार ने बताया कि सीज किए गए सामान की जांच सोमवार से शुरू होगी और उसकी कीमत का निर्धारण मूल्यांकन समिति करेगी।
उन्होंने बताया कि शनिवार को भी कई टीमों ने रेलवे से आने वाले सामान की चेकिंग की पर टैक्स चोरी का सामान पकड़ में नहीं आया।
सामने जांच,पीछे से सामान पार
शुक्रवार को वाणिज्य कर एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों को व्यापारियों ने बातचीत का सहारा लेकर उलझा लिया। इस दौरान पार्सल घर के पास पड़े सामान की जांच चलती रही, लेकिन चंद वाणिज्य कर अफसरों के इशारे पर टैक्स चोरी के सामान को कैब वे की तरफ से पार कर दिया गया।
इस सामान में अधिकतर चायनीज मोबाइल,एसेसरीज एवं होजरी का सामान शामिल था।
आश्चर्य की बात यह कि वाणिज्य कर सचल दस्ते एवं चंद अधिकारियों को यह जानकारी थी कि स्टेशन के पार्सल घर पर शिकंजा कसेंगे तो दूसरे रास्ते से सामान पार हो जाएगा। इसके बाद भी वहां अधिकारियों को तैनात नहीं किया।
सूत्र बताते हैं कि वाणिज्य कर अफसर सजग होते तो शुक्रवार को कानपुर की तर्ज पर करोड़ों रुपये का टैक्स चोरी का सामान पकड़ा जाता।