लखनऊ। प्राविधिक विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक एवं कंप्यूटर के माध्यम से पारंपरिक कलाओं से जोड़ सकते हैं। विद्यार्थी शिल्पकारों के उत्पादों एवं डिजाइनों का अध्ययन कर नए डिजाइन तैयार करना सीखें तथा कलाकारों के साथ मिलकर काम करें। ये बाते प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को कैसरबाग स्थित सफेद बारादरी में ग्रामश्री एवं क्राफ्टरूट्स की ओर से आयोजित तीन दिवसीय हस्तशिल्प प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर कहीं। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों के उपस्थित कुलपतियों से कहा कि वे अपने विद्यार्थियों को ऐसी प्रदर्शनियों का भ्रमण कराएं ताकि वे शिल्पकारों की कार्यकुशलता, रचनात्मकता और कला की बारीकियों को समझ सकें।
प्रदर्शनियां स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम-
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि पीएम मोदी और सीएम योगी निरंतर आत्मनिर्भरता का संदेश देते हैं। ऐसी प्रदर्शनियां आत्मनिर्भर बनने और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने केजीएमयू की कुलपति प्रदर्शनी में आए कारीगरों के स्वास्थ्य का ध्यान रखने के निर्देश दिए। इसके साथ ही अपनी पुस्तक चुनौतियां मुझे पसंद हैं का उल्लेख करते हुए बताया कि पुस्तक की बिक्री से प्राप्त राशि बच्चों की शिक्षा पर व्यय की जाएगी।
22 राज्यों से शिल्पकारों ने की सहभागिता-
प्रदर्शनी में देश के 22 राज्यों के 90 से अधिक शिल्पकार एवं कारीगर भाग ले रहे हैं। प्रदर्शनी में हस्तशिल्प उत्पादों, पारंपरिक कलाकृतियों और विविध शिल्प विधाओं के साथ स्टोन वर्क, काष्ठ कला, धातु शिल्प, पारंपरिक शॉल, साड़ियों, वस्त्रों और आभूषणों सहित विभिन्न उत्पादों के 90 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। इस अवसर पर उप्र महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव, विशेष कार्याधिकारी राज्यपाल सुधीर एम बोबड़े क्राफ्टरूट्स संस्था की अध्यक्ष अनारबेन पटेल, राजेश दयाल सहित तमाम लोग मौजूद रहे।