लखनऊ में कोडीन कफ सिरप समेत एनडीपीएस श्रेणी की दवाओं के अवैध व्यापार और डायवर्जन के खिलाफ जारी अभियान के दायरे में प्रदेश के 52 जिले आ चुके हैं। इन जिलों में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के छापों में बेशुमार फर्जी फर्मों का पता चला है, जिनका इस्तेमाल केवल बिलिंग के लिए हो रहा था। बीते दो माह के दौरान 31 जिलों में 133 फर्मों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एफएसडीए कफ सिरप की तस्करी करने वाले सिंडीकेट पर शिकंजा कसता जा रहा है। एफएसडीए सचिव एवं आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि सीएम के निर्देश पर विभाग ने कोडीनयुक्त कफ सिरप का अवैध डायवर्जन करने वालों के खिलाफ एनडीपीएस और बीएनएस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई हैं। वहीं जिलाधिकारियों को गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई के लिए पत्र लिखा।
बीते दो माह के दौरान प्रदेश के 52 जिलों में 332 औषधि विक्रय प्रतिष्ठानों के दस्तावेज और भंडारण की जांच की गई, जिसमें सामने आया कि कई औषधि प्रतिष्ठान अस्तित्व में हीं नहीं हैं। कई प्रतिष्ठानों में पर्याप्त भंडारण की व्यवस्था नहीं थी। औषधियों के क्रय-विक्रय के अभिलेख भी नहीं पाए गए।
जांच में सामने आए ये मामले...
जांच में सामने आया कि 133 फर्मों द्वारा संगठित रूप से इन औषधियों का गैर चिकित्सकीय उपयोग के लिए अवैध डायवर्जन कर नशे के रूप में दुरुपयोग किया जा रहा है। इसे लखनऊ, कानपुर, लखीमपुर खीरी, बहराइच के जरिये नेपाल और वाराणसी, गाजियाबाद से बांग्लादेश भेजा जा रहा है।
इन शहरों में ज्यादा गड़बड़ी
वाराणसी, जौनपुर, कानपुर नगर, गाजीपुर, लखीमपुर खीरी, लखनऊ, बहराइच, बिजनौर, प्रयागराज, प्रतापगढ़, सीतापुर, सोनभद्र, बलरामपुर, रायबरेली, संतकबीर नगर, हरदोई, भदोही, अमेठी, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, उन्नाव, बस्ती, अंबेडकनगर, आजमगढ़, सहारनपुर, बरेली, सुल्तानपुर, चंदौली, मीरजापुर, बांदा, कौशांबी।