सीएम ने कहा कि परिवार में बालिका जन्म लेती है तो सबसे पहली टिप्पणी घर की दादी की होती है। ऐसी मानसिकता को बदलना होगा। बालक हो या बालिका, उसके साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ जिले ऐसे हैं, जहां बालिकाओं के साथ भेदभाव की शिकायतें आती हैं। लिंगानुपात में भारी अंतर देखने को मिल रही है। भेदभाव खत्म करने को एक वर्ष के दौरान बहुत काम हुआ है लेकिन अभी और सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विषमता सिर्फ सरकार खत्म नहीं कर सकती, इसके लिए महिलाओं को भी आगे आना होगा।
सीएम के हाथों ये हुईं सम्मानित
मुख्यमंत्री ने जिन्हें पुरस्कार दिया उनमें लखनऊ की ज्योति श्रीवास्तव, सिंधु व डॉ. जेड एमएस (मऊ), कुंवर दिव्यांश व महजबी (बाराबंकी), पुष्पा व तारा (बहराइच), रीतिका (मेरठ), रीमा सिंह (चंदौली), वर्षा सिंह (बस्ती), रंजना द्विवेदी व अवधेश कुमारी (गोरखपुर), सलिया बानो (फर्रुखाबाद) और शहनाज बानो (वाराणसी) शामिल हैं।
अपने-पराये नहीं, मेरिट पर हुआ चयन
रानी लक्ष्मी बाई वीरता पुरस्कार के लिए चयन को लेकर मुख्यमंत्री ने किसी का नाम लिए बगैर पिछली सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने कि इस पुरस्कार के लिए चयन अपने-पराये के आधार पर नहीं, बल्कि मेरिट और महिलाओं के योगदान को देखकर किया है। उनकी सरकार में कोई भी योजना सबको ध्यान में रखकर संचालित की जाती है न किसी जाति, धर्म या क्षेत्र को ध्यान में रखकर।
पं.धर्मनाथ मिश्र को सम्मानित करते सीएम।
- फोटो : amar ujala
सीएम योगी ने ठुमरी, दादरा, चैती, होरी व कजरी गायक पं.धर्मनाथ मिश्र और गजल, ठुमरी व शास्त्रीय संगीत गायक उस्ताद सखावत हुसैन खान को बेगम अख्तर पुरस्कार 2017-18 प्रदान कर सम्मानित किया। पंडित धर्मनाथ मिश्र वाराणसी के और उस्ताद सखावत हुसैन खान रामपुर के निवासी हैं।
उस्ताद सखावत हुसैन खान को सम्मानित करते सीएम
- फोटो : amar ujala
सीएम ने कहा कि समाज में बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जिसके लिए कार्य किए जाने की आवश्यकता है। प्रयास समाज के बीच से ही होना चाहिए। जो व्यक्ति समाज के लिए कार्य करेगा, उसे हमारी सरकार सम्मानित करेगी। योगी ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार के माध्यम से सरकार जागरूक महिलाओं से खुद को जोड़ रही है। इसके परिणाम सामने आने लगे हैं। समाज के बीच से आने वाली महिलाएं अन्य के लिए प्रेरणा बन रही हैं। बोले कि महिलाओं के कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। महिलाओं के लिए 1090 हेल्पलाइन तो पहले से ही है, अब 181 रेस्क्यू वैन प्रत्येक जनपद को उपलब्ध करा दी गई है। यदि महिलाएं हिंसा या शोषण का शिकार होती हैं तो वे इन सेवाओं का लाभ उठा सकती हैं।