सीतापुर में सिधौली-मिश्रिख-पिसांवा-नेरी मार्ग के सिधौली से कल्ली होते हुए नैमिषारण्य बीपी मार्ग के किलोमीटर 134 तक दो लेन पेव्ड शोल्डर के निर्माण को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। इस मार्ग की कुल लंबाई 42.60 किमी है।
दो लेन सड़क निर्माण के लिए पैसेंजर कार यूनिट (पीसीयू) मानक में ढील देने पर यह फैसला कैबिनेट में लाया गया था। व्यय वित्त समिति से इस मार्ग की लागत 72.44 करोड़ रुपये स्वीकृत की है। जीएसटी इससे अलग होगा। मार्ग का निर्माण दो साल में पूरा करना होगा।
स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग और मुख्य लेखा परीक्षा अधिकारी, सहकारी समितियां एवं पंचायतें सभी संस्थाओं और निकायों का ऑडिट निशुल्क करेंगी। संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इस मद पर हर साल करीब 25 करोड़ रुपये का व्यय आता था।
स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग द्वारा नगरीय स्थानीय निकायों, विश्वविद्यालयों, शैक्षिक संस्थाओं व अन्य संस्थाओं और मुख्य लेखा परीक्षा अधिकारी सहकारी समितियों व पंचायतों की लेखा परीक्षा करते हैं। इनमें से कई संस्थाएं या तो शासन से अनुदान पा रही हैं या स्थानीय प्राधिकारी घोषित होने से शुल्क या टैक्स कलेक्शन करती हैं। ऑडिट फ्री होने पर ये संस्थाएं शुल्क की राशि विकास कार्यों पर खर्च कर सकेंगी।
गोरखपुर में शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान के निर्माण के लिए 181.83 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी है। निर्माणाधीन प्राणि उद्यान का प्रस्तावित क्षेत्रफल 121.34 एकड़ है। सरकारी प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि गोरखपुर में इसकी स्थापना वर्ष 2008-09 में प्रस्तावित की गई थी। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की तकनीकी समिति ने पुनरीक्षित मास्टर (ले-आउट) प्लान का अनुमोदन किया था। परियोजना की वर्तमान लागत 181 करोड़ 82 लाख 95 हजार रुपये है। जीएसटी अलग होगा। उन्होंने कहा कि प्राणि उद्यान के बनने से जहां वन्य जीवों को संरक्षण मिलेगा, वहीं पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
पुलिस अधिकारियों के दंड व अपील से संबंधित मामलों को तेजी से निपटाने के लिए कैबिनेट ने डीजीपी मुख्यालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकारी प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि ‘उप्र. अधीनस्थ श्रेणी के पुलिस अधिकारियों की दंड और अपील नियमावली 2018’ में संशोधन करते हुए रिव्यू और अपील की जिम्मेदारी डीजी स्तर के अधिकारी को देने की मंजूरी दी गई है। पहले इसका रिव्यू और अपील पर सुनवाई डीजीपी ही करते थे। अब डीजीपी किसी अधिकारी को पुलिस कार्मिकों के प्रत्यावेदन और अपील के लिए नामित कर सकेंगे। नामित अधिकारी डीजी रैंक से कम का नहीं होगा। नियमावली में संशोधन के बाद पुलिस अधिकारियों के प्रत्यावेदन और अपील निस्तारण में तेजी आएगी।