पिछड़ी जाति : यादव-जाटव को 5, अति पिछड़ों को 23 फीसदी आरक्षण मिले।
- आरक्षण 27 से बढ़ाकर 28 फीसदी किया जाए। प्रदेश में 54 फीसदी आबादी पिछड़ी है। इनमें यादव 19.40 फीसदी हैं। इन्हें 5 फीसदी आरक्षण मिले। अन्य बिरादरी में कुर्मी, लोध, मौर्य, तेली, तमोली, कुम्हार सहित अन्य कई नाम से जानी जाने वाली 78 जातियां आती हैं। इन्हें 23 फीसदी आरक्षण मिले।
- अनुसूचित जाति : जाटव को 10, अति दलित को 11 फीसदी कोटा मिले
कोटा 21 फीसदी ही रहे। प्रदेश में 22 फीसदी दलित आबादी में जाटव 55 फीसदी हैं, जबकि 45 प्रतिशत हिस्सा पासी, खटिक, धानुक, वाल्मीकि सहित अन्य नाम वाली 65 से अधिक जातियों का है। जाटव को 10 फीसदी, गैर जाटव यानी अति दलितों को 11 फीसदी आरक्षण निर्धारित किया जाए।
- उत्तराखंड बनने के चलते एसटी का कोटा 2 से घटाकर 1 फीसदी किया जाए।
देश के 11 राज्यों में अति पिछड़ों को अलग से आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इनमें बिहार, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पांडिचेरी, हरियाणा, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, केरल, जम्मू-कश्मीर (आंशिक) शामिल हैं।