आदेश पारित करते समय राज्य सरकार को पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। आदेश एकपक्षीय है और इससे पहले भी मुख्तार को इस प्रकार की अनुमति दी जा चुकी है, जबकि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 62(5) के अनुसार जेल में बंद व्यक्ति को मतदान की अनुमति नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने मतदान करने के आदेश पर रोक लगाते हुए अगली सुनवाई के लिए नौ अप्रैल की तिथि नियत की है।