बतौर मुख्यमंत्री निकाय चुनाव योगी आदित्यनाथ के लिए पहली परीक्षा है। वह इसमें अव्वल श्रेणी से पास होने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते। भाजपा संगठन जहां इस चुनाव के समीकरण दुरुस्त कर रहा है तो योगी अपनी सरकार को इस मोर्चे पर लगाए हुए हैं।
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वह अब तक लगभग सभी प्रमुख महानगरों का ही नहीं बल्कि प्रमुख जिला मुख्यालयों का भी दौरा पूरा कर चुके हैं। कुछ स्थानों पर वह दो- तीन बार हो आए हैं। उस महानगर या नगर में विकास कार्यों का शिलान्यास या लोकार्पण कर वहां के लोगों के बीच सरकार के जरिये संगठन की पकड़ व पहुंच को मजबूत बनाने की कोशिश की जा चुकी है।
दरअसल, शहरी क्षेत्र के मतदाता भाजपा का मुख्य आधार रहे हैं। अब योगी को इसी आधार वोट के बीच से भाजपा के लिए सिर्फ जीत का रास्ता ही नहीं निकालना है बल्कि ज्यादा से ज्यादा वार्डों में पार्टी का परचम फहराने की परीक्षा से गुजरना है।
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वजह, भले ही भाजपा संगठन के आधार पर चुनाव लड़ती हो लेकिन इससे कोई इन्कार नहीं कर सकता कि प्रदेश में निकाय चुनाव के नतीजे योगी सरकार के कामकाज की कसौटी बनेंगे। इन्हीं नतीजों से उनकी सरकार की लोकप्रियता तथा जनता के बीच बीते सात महीने में पार्टी के ग्राफ में उतार-चढ़ाव का सच सामने आएगा।
एक पंथ दो काज
सीएम आदित्यनाथ योगी
- फोटो : डेमो
यानी, नतीजे योगी की छवि और क्षमता का सबूत देने वाले होंगे। योगी को भी शायद इस बात का अंदाज है। उन्हें पता है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उन्हें केरल, गुजरात और हिमाचल में घुमाकर राष्ट्रीय स्तर पर उनका चेहरा निखारने में जुटा है। ऐसे में उन्हें इस पहली परीक्षा में हर हाल में अव्वल श्रेणी के अंक हासिल करना जरूरी है।
ज्यादा पीछे न जाएं। सिर्फ एक सप्ताह के मुख्यमंत्री के दौरों पर नजर डालें तो यह बात और साफ हो जाती है। इस एक सप्ताह में योगी गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, अयोध्या, हमीरपुर, चित्रकूट और बिजनौर की यात्रा कर चुके हैं। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद कई बार वाराणसी जा चुके योगी 25 अक्तूबर को फिर वहां जा रहे हैं।
वह वहां कई परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण करेंगे। 26 अक्तूबर को वह आगरा जाएंगे, जहां कई विकास योजनाओं का शिलान्यास होना है। जाहिर है, इन सभी यात्राओं के पीछे मकसद शहरी मतदाताओं को भाजपा के साथ और मजबूती से लामबंद करना तथा उनकी समस्याओं के समाधान की चिंता करने का संदेश देना नजर आता है।
अयोध्या, चित्रकूट, मथुरा और वाराणसी जैसे स्थानों के दौरे तथा यहां विकास योजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण करके योगी ने यह संदेश भी देने की कोशिश की है कि सरकार के एजेंडे में विकास के साथ हिंदुत्व के सरोकार भी हैं।
इन जगहों को सजा-संवार कर एवं उन्हें पर्यटन के लिहाज से जरूरी सुविधाएं मुहैया कराना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता में है ताकि यहां के लोगों को रोजगार मिले और देश व दुनिया को इन स्थानों के सहारे हिंदुत्व की संस्कृति व सरोकारों के बारे में भी जानकारी हो। कुल मिलाकर हर वह उपाय करने की कोशिश दिखती है जो वोट बढ़ाने में मददगार बने।
प्रदेश में पिछली बार हुए 12 नगर निगमों के चुनाव में भाजपा के महापौर 10 में जीते थे। कई नगर पालिका परिषदों तथा नगर पंचायतों में भी भाजपा के अध्यक्ष जीते थे। पर, प्रदेश के किसी नगर निगम सदन में भाजपा को बहुमत नहीं मिल पाया था। भाजपा तब सत्ता में नहीं थी, इसलिए पार्टी की बहुत किरकिरी नहीं हो पाई थी।
इस बार स्थिति दूसरी है। न सिर्फ महापौर, अध्यक्ष बल्कि सदनों में पार्षद व सदस्य के नतीजे भी कहीं न कहीं भाजपा और योगी सरकार की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखे जाएंगे। यही नहीं, प्रदेश में चार नगर निगमों में पहली बार चुनाव होने जा रहे हैं।
इनमें भाजपा के एजेंडे वाले स्थान अयोध्या तथा मथुरा-वृंदावन शामिल हैं। जाहिर है, इनमें कहीं भी भाजपा की अपेक्षा के विपरीत नतीजे न सिर्फ सरकार पर हमले बढ़ाएंगे बल्कि लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारियों को भी प्रभावित करेंगे। ऐसा न भाजपा चाहेगी और न मुख्यमंत्री योगी।