श्रीरामवल्लभाकुंज के प्रमुख राजकुमार दास कहते हैं कि आचार्य सत्येंद्र दास बेहद सहज और सरल होकर भी रामलला और उनके सेवा को लेकर बेबाक टिप्पणी करते थे। यह उनकी परम रामभक्ति का परिचायक था। उन्होंने हर परिस्थितियों में रामलला की बेहतर से से बेहतर सेवा की। उनका यह योगदान करोड़ों रामभक्त परिवार हमेशा याद रखेगा। यह संयोग कहें या राम की कृपा की माघ पूर्णिमा के पवित्र दिन उन्होंने परलोक के लिए प्रस्थान किया।
अयोध्याधाम के आचार्य रत्नेश ने कहा कि श्रीरामलला की नित्य सेवा के लिए नित्यधाम में प्रविष्ट हो गए श्रीरामलला के अनन्य भक्त श्रीरामजन्मभूमि के मुख्य पुजारी सत्येन्द्र दास जी महाराज। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख नायकों में से एक रहे। सत्येंद्र दास जी महाराज ने ही 1992 में बाबरी ध्वंस के समय रामलला की मूर्तियां गोद में लेकर सुरक्षित हटाईं थीं। वह लंबे समय से श्रीराम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी थे।
श्रीअयोध्या धाम के पंडित कल्किराम ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास जी के निधन से बहुत दुखी हूं। 14 जनवरी 2014 को अनेकों प्रतिबंध के बाद भी श्रीराम जन्मभूमि परिसर के मुख्य गर्भगृह स्थल पर परम्परागत फहराया जाने वाला धर्म ध्वज विजय ध्वज फहराकर मोदी जी के विजयश्री की कामना के लिए मेरे द्वारा शुरू होने वाले धार्मिक महानुष्ठान की सफलता का आशीर्वाद दिया था और समय समय पर भेंट किए गए ध्वज को बीते दस वर्षों तक लगातार फहराया भी।
मैं अक्सर उनसे मिलने जाता था और वह मुझे बहुत स्नेह रखते थे। एक बार मैं रामलला की पोशाक लेकर गया तो बातचीत में ही उन्होंने पूछा कि प्रधानमंत्री जी के लिए जो अनुष्ठान कर रहे हैं इसमें तो बहुत खर्च आता है उसके लिए धन कौन देता है?
मैंने कहा कि पूजा पाठ कर्मकाण्ड से जो मिलता है उसी से करते हैं तब उन्होंने कहा कि यह सबसे महान कार्य है करते रहो जब कभी मौका मिला तो मैं इसे प्रधानमंत्रीजी से कहूंगा और वर्ष 2022 में जब प्रधानमंत्री मोदी जी दीपोत्सव में शामिल होने श्री अयोध्या जी आए और श्रीराम लला सरकार का दर्शन पूजन करने पहुंचे तो उन्होंने प्रधानमंत्री जी से मेरे अनुष्ठान की चर्चा भी की। हृदय की गहराइयों से नमन करते हुए जगतपति भगवान श्रीहरि विष्णु जी से उनके उत्तम लोक प्रदान करने की प्रार्थना करता हूं।