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भारत-नेपाल आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा: सीएम योगी

Fri, 14 Feb 2020 12:39 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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सीएम योगी ने सरकारी आवास पर दूसरी भारत- नेपाल द्विपक्षीय वार्ता को संबोधित किया। - फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत और नेपाल का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संबंध सांझी विरासत का हिस्सा है। इसमें राजनीति नहीं आनी चाहिए। भारत समृद्ध होता है, तो नेपाल में भी समृद्धि आती है। क्योंकि आधा नेपाल भारत में बसता है। भारत-नेपाल वार्ता दोनों देशों की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के साथ ही व्यापार को भी नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएगा।
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वे गुरुवार को पांच कालिदास मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास पर दूसरी भारत-नेपाल द्विपक्षीय वार्ता में बोल रहे थे। इंडिया फाउंडेशन, नीति अनुसंधान प्रतिष्ठान नेपाल और नेपाल-इंडो चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री काठमांडू के तत्वावधान में हुई वार्ता में उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लिए यह बेहतर पहल है।

भारतीय सेना में नेपाल के लोग सिपाही से लेकर उच्च पदों तक पर हैं। ये भारत का विश्वास है। नेपाल टूरिज्म का सबसे बड़ा हब बन सकता है। पीएम मोदी ने काशी विश्वनाथ से पशुपतिनाथ को जोड़ा है। जनकपुरी से अयोध्या को भी जोड़ा गया है। वाराणसी अगर स्मार्ट सिटी बन रही है तो काठमांडू क्यों पीछे रहे।
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‘भारत-नेपाल को संबंधों को सुदृढ़ करना होगा’

सीएम ने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर में चढ़ने वाले पुष्प और अन्य वस्तुओं से इत्र और धूप बनाई जा रही है। कभी नक्सलवाद से पीड़ित महिलाओं का परिवार आर्थिक रूप से समृद्ध हो रहा है। मंदिर से गाइड के रूप में जुड़कर युवा लाखों रुपये महीने कमा रहे हैं। नेपाल में ऐसे अनेक मंदिर और सांस्कृतिक धरोहर हैं।

यहां भी रोजगार को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने कहा कि हम चाहते हैं कि भारत की प्रगति का फायदा पड़ोसी देशों को भी मिले। नेपाल कांग्रेस के महासचिव डॉ. शशांक कोइराला ने कहा कि आध्यात्मिक पर्यटन को लेकर नेपाल सीएम योगी से खासा प्रभावित है

उधर, गोमती नगर स्थित एक होटल में हुए कार्यक्रम में पूर्व भारतीय राजदूत व जेएनयू के प्रोफेसर सुखदेव मुनि ने कहा कि नेपाल से भारत के संबंध सुदृढ़ करने के लिए टूरिज्म, ट्रांसपोर्ट, एनर्जी व जर्नलिज्म के क्षेत्र में भी कार्य करना होगा। सिर्फ तीर्थ यात्रा के रूप में जुड़ने से आपसी विश्वास नहीं पैदा होगा। पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता ने कहा कि चीन की तरह ही भारत को नेपाल से जुड़ाव बढ़ाने के लिए सड़कें व रेल मार्ग को विकसित करना होगा।
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