भले ही सांसदों के धरने और पीएम को सीएम के पत्र को मुद्दा बनाकर सपा-भाजपा एक दूसरे पर हमले बोल रहे हों लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बड़ी संजीदगी से पूरे मामले पर अपनी खामोशी तोड़ी।
उन्होंने कहा, जमाना रिटर्न गिफ्ट का है, सांसद हमें ज्ञापन देते तो हम भी उन्हें कुछ देते। प्रदेश और केंद्र को एक दूसरे की जरूरत है।
राजधानी में सोमवार को भाजपा और सपा नेता तल्ख अंदाज में पत्रकारों से रूबरू थे। लेकिन, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सांसदों के धरने पर सधे अंदाज में प्रतिक्रिया दी। टकराव जैसी बातें नहीं कही।
उन्होंने धरनास्थल पर भीड़ को लेकर जरूर चुटकी ली। अपने सरकारी आवास पर दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने मीडियाकर्मियों के खास आग्रह पर केवल भाजपा सांसदों के धरने से जुड़े एक सवाल का जवाब दिया।
अखिलेश बोले, फिर प्रधानमंत्री को पत्र लिखूंगा
सीएम ने कहा, विधानसभा के सामने सांसदों ने धरना दिया। (चुटीले अंदाज में) बड़ी संख्या में लोग आए। हालांकि तत्काल बोले, मैं उनकी गिनती पर नहीं जाऊंगा। उन्हें ज्ञापन देना था। हमें लग रहा था वे मिलने आएंगे लेकिन नहीं आए। कहा, अब जमाना रिटर्न गिफ्ट का है। वे ज्ञापन सौंपते तो हम भी उन्हें कुछ देते।
शायद उनका आशय था कि वे प्रदेश की समस्याएं सांसदों को बताते। सीएम ने कहा, जितना उन्हें (भाजपा सांसदों को) हमसे चाहिए, उतना ही हमें भी केंद्र सरकार से जरूरत है। वह बोले, मैं फिर प्रधानमंत्री को पत्र लिखूंगा।
उम्मीद है, यूपी को ज्यादा लाभ मिलेगा, प्रदेश को ज्यादा मदद मिलेगी। पश्चिमी यूपी के कुछ जिलों में सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाली घटनाओं से जुड़ा सवाल होने पर उन्होंने हाथ जोड़े और मुस्कुराते हुए चले गए।