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सीएम योगी बोले, ताज के संरक्षण पर खर्च करेंगे 370 करोड़

Wed, 25 Oct 2017 12:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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सीएम योगी - फोटो : डेमो
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ताजमहल को लेकर अपने बयान पर कायम रहते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि ताज हमारी विरासत है, उसकी हिफाजत सरकार की जिम्मेदारी है। इसलिए प्रदेश सरकार ने ताज के संरक्षण के लिए 370 करोड़ रुपये की कार्ययोजना बनाई है।
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उन्होंने बताया कि गुरुवार को वह खुद आगरा जा रहे हैं। ताज केसंरक्षण के लिए कई परियोजनाओं का शिलान्यास भी करेंगे। सीएम ने कहा, ताज पर मेरे बयान को लोग गलत नजरिए से देख रहे हैं।
 मुख्यमंत्री मंगलवार को एक कार्यक्रम में पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे।

ताज पर दिए बयान पर अडिग रहते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, उनका मानना है कि ताज वास्तुकला की एक अनुपम इमारत है और हमारे देश की विरासत भी है। उसके निर्माण में देश का पैसा लगा है। हजारों मजदूरों का खून-पसीना बहा है।
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इसलिए उसके संरक्षण का काम कराया जाएगा। रामायण व कृष्ण सर्किट में ताज का उल्लेख न होने का जवाब देते हुए कहा कि ताज देश का एक महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल है। इसलिए वह आज भी सरकार केपर्यटन विकास के एजेंडे में सबसे ऊपर है।
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​अयोध्या को पहचान दिलाने के लिए मनाई दिवाली

सीएम आदित्यनाथ योगी - फोटो : डेमो
खराब कानून-व्यवस्था का सवाल खारिज करते हुए सीएम ने कहा, जो लोग सवाल उठा रहे हैं उन्हें कैराना व संभल जाकर स्थिति का आकलन करना चाहिए, जहां पलायन कर चुके 80 प्रतिशत व्यापारी लौट आए हैं। 7 महीने में एक भी दंगा नहीं हुआ जबकि पिछली सरकारों में हर सप्ताह दंगे होते थे। पहले व्यापारी पलायन करते थे, अब अपराधी पलायन कर रहे हैं। 

 योगी ने कहा कि गंगा कब तक साफ होगी, इसके लिए समय सीमा तो निर्धारित नहीं की जा सकती। हां, यह प्रयास जरूर किया जा रहा है कि  इलाहाबाद में अर्धकुंभ से पहले प्रदेश में कहीं भी गंगा में सीवर न गिरे। सरकार की कोशिश है कि अगले साल अक्तूबर तक सभी एसटीपी को चालू कर दिया जाए ताकि गंगा में सीवर गिरना बंद हो जाए।

अयोध्या में दिवाली मनाने को राम मंदिर निर्माण से जोड़कर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा, अयोध्या तो विश्व के पटल पर स्थापित है, फिर भी उपेक्षित है। इसलिए सरकार अयोध्या को पहचान दिलाने के लिए जो कर सकती है वह कर रही है।

दीपावली मनाने के पीछे भी यही उद्देश्य था। रही बात राम मंदिर निर्माण की तो मामला कोर्ट में है। लोगों को कोर्ट के आदेश की प्रतीक्षा करनी चाहिए। हां, दोनों पक्षकार अगर चाहें तो आपसी संवाद से भी मामला सुलझाया जा सकता है।
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