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Gomati Nagar: 2500 करोड़ रुपये मिलें तो सुधरे गोमती की सेहत, नदी में गिरने वाले नालों को किया जाएगा बंद

Thu, 25 Aug 2022 04:48 PM IST
ishwar ashish प्रवेंद्र गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ

सार

2500 करोड़ रुपये मिलने पर गोमती नदी की सफाई का काम होगा। नए एसटीपी बनाए जाएंगे और नदी में गिरने वाले नालों को रोका जाएगा।
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गोमती नदी। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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प्रदूषण की मार से दम तोड़ रही गोमती को बचाने के लिए 2500 करोड़ रुपये से अधिक के बजट की खुराक चाहिए। जीवनदायिनी नदी में शहर का सीवर न गिरे और उसका पानी साफ रहे, इसके लिए बने प्रोजेक्ट पर यह रकम खर्च होगी। इसके तहत पंपिंग स्टेशन व सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाएंगे। इसे लेकर प्रस्ताव कई बार बने, लेकिन अब तक न तो बजट जारी हुआ और न ही गोमती में नालों के जरिये सीवर का गिरना बंद हो पाया। मंडल के प्रभारी मंत्री जितिन प्रसाद ने नालों और एसटीपी का निरीक्षण कर नदी को स्वच्छ बनाने के लिए एसटीपी की क्षमता बढ़ाने और नालों का गिरना रोकने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद अब फिर से पुराने प्रस्तावों पर चर्चा शुरू हुई है। इन प्रोजेक्टों पर काम हो तो वर्ष 2040 तक गोमती को गंदगी से निजात मिल सकती है।

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वर्ष 2019 में हाईकोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती के बाद गोमती को पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त करने की योजनाएं बनाई गईं। इसके तहत नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने हैं। साथ ही उन नालों को भी टेप कर बंद किया जाना है, जो सीधे नदी में गिर रहे हैं। इसके अलावा एसटीपी तक सीवर और नाले के पानी को ले जाने के लिए पंपिंग स्टेशन भी बनाए जाने हैं। जो एसटीपी बनाए जाने हैं, 15 साल तक उनकी मेंटेनेंस का खर्च भी प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है। बजट जारी न होने से जमीनी स्तर पर इन प्रोजेक्ट का काम नहीं शुरू हो सका। ऐसे में गोमती में सीवर का गिरना भी जारी है।

सीवर ज्यादा, एसटीपी की क्षमता कम 
शहर से निकलने वाले सीवर और नालों के गंदे पानी को साफ करने के लिए दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट चालू हैं। इनमें से एक गोमती नगर विस्तार क्षेत्र के भरवारा और दूसरा पुराने लखनऊ के दौलतगंज में है। तीसरा एसटीपी लोहिया पथ पर हैदर कैनाल की खाली पड़ी जमीन पर बनाया जा रहा है। वहीं, शहर में करीब 750 एमएलडी सीवर रोजाना निकलता है, जबकि इनमें से 438 एमएलडी का ही निस्तारण हो पाता है है। 120 एमएलडी का एक और एसटीपी चालू होने के बाद यह क्षमता 558 हो जाएगी। हालांकि, इसके बाद भी 192 एमएलडी सीवर सीधे गोमती में ही गिरेगा। ऐसे में नमामि गंगे योजना के तहत गोमती में सीधे गिर रहे नालों को रोकने के लिए नए एसटीपी बनाने के प्रोजेक्ट तैयार किए गए हैं।
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गोमती को प्रदूषण मुक्त करने को प्लान
- बरीकाल में एक  एमएलडी का एसटीपी बने।
- दौलतगंज में 39 एमएलडी का नया एसटीपी और 56 एमएलडी के पुराने एसटीपी की मरम्मत हो।
- भरवारा में 64 एमएलडी का नय एसटीपी बने।
- घैला में 22 एमएलडी के एसटीपी का हो निर्माण।
- बिजनौर क्षेत्र में 80 एमएलडी का एसटीपी बने।

नगर निगम से मांगे हैं प्रोजेक्ट
नगर निगम के मुख्य अभियंता महेश वर्मा का कहना है कि प्रभारी मंत्री ने निर्देश दिया है कि सीवर गोमती में न गिरे। इसके लिए एसटीपी की क्षमता बढ़ाने पर काम करने के लिए जल निगम को कहा गया है। इसे लेकर  जल निगम ने प्रस्ताव बनाए हैं, जिन पर 2500 करोड़ रुपए का खर्च है। जल निगम से प्रोजेक्ट मांगे गए हैं। इन्हें मंजूरी के लिए शासन को भेजा जाएगा। एसटीपी का काम जल निगम ही करता है।

समस्या हल करने को उठाएंगे सभी कदम
पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद का कहना है कि एसटीपी की क्षमता बढ़ाए जाने की जरूरत है, ताकि पूरे डिस्चार्ज का ठीक से ट्रीटमेंट हो सके। कहां और क्या दिक्कतें आ रही हैं या कहां बजट की कमी है, इसके लिए रिपोर्ट मांगी है। निस्तारण की पूर्ण व्यवस्था के लिए सभी संभव कदम उठाए जाएंगे।

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