लखनऊ। नसीर आलमबाग निवासी हैं। उनका ऑटो वर्ष 2019 में चोरी हो गया था। उन्होंने मामला दर्ज कराया। इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम भी ले लिया। अब छह साल बाद उन्हें 17 हजार रुपये का नोटिस भेजा गया है। आरटीओ दफ्तर पहुंचने पर उन्हें पता लगा कि इंश्योरेंस कंपनी से क्लीयरेंस की सूचना नहीं देने पर ऐसी दिक्कत हुई।
नसीर की तरह चोरी के ऐसे 350 वाहन हैं, जिनके क्लीयरेंस की सूचना आरटीओ कार्यालय को नहीं दी गई है। लिहाजा आरटीओ ने नोटिस भेजा है। एआरटीओ प्रशासन प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि आमतौर पर चोरी हुई गाड़ियों के लिए पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जाती है। इसके आधार पर इंश्योरेंस कंपनी जांचकर क्लेम का भुगतान करती है। क्लेम का भुगतान होने के बाद गाड़ी का स्वामित्व इंश्योरेंस कंपनी का हो जाता है, लेकिन वाहन मालिक को इंश्योरेंस कंपनी क्लीयरेंस से जुड़े प्रपत्रों को आरटीओ दफ्तर में देना होता है, ताकि वाहन के मालिक का नाम, पता बदल सके। अपरिहार्य स्थिति में वाहन बरामद होने पर स्वामित्व इंश्योरेंस कंपनी का होता है, लिहाजा कागजों में इसका दर्ज होना अनिवार्य है। टैक्स का भुगतान नहीं होने पर उसी मालिक के नाम नोटिस भेजा जाता है, जिसके नाम वाहन का पंजीकरण होता है। नोटिस पाने वाले वाहन मालिक आरटीओ आकर क्लीयरेंस करा रहे हैं।