बरेली/लखनऊ। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में एमए उर्दू के छात्रों का मामला विधान परिषद में प्रमुखता से उठाया गया। नियम-110 के तहत कांग्रेस के रायबरेली एमएलसी दीपक सिंह ने यह मामला उठाया। इसमें लोक महत्व के प्रश्न पर सदन में चर्चा होती है।
दीपक सिंह ने कहा कि एमए उर्दू के सैकड़ों छात्रों का साल बर्बाद होने के कगार पर है। विश्वविद्यालय की गलती से इनके रिजल्ट आरडी लगाकर रोक दिए गए हैं। 16 जुलाई को छात्रों ने कुलपति से मिलकर उनसे साल बर्बाद होने से रोकने की गुहार लगाई थी, पर छात्रों की बात विश्वविद्यालय प्रशासन ने नहीं सुनी। दीपक सिंह ने कहा कि अगर छात्रों को परीक्षा सुधार फॉर्म भरने की विशेष अनुमति मिल जाए तो इन छात्रों का भविष्य चौपट होने से बच सकता है। पूर्व में इन छात्रों की ओर से भरे गए फॉर्मों में गड़बड़ियों के लिए पूरी तरह से विश्वविद्यालय प्रशासन जिम्मेदार है। उन्होंने सदन में कहा कि वे लोक महत्व के इस प्रश्न पर सदन का ध्यान आकृष्ट कराकर शासन से जांच की मांग करते हैं। मामला आवश्यक कार्यवाही के लिए शासन को भेज दिया गया है। दीपक सिंह ने बताया कि बरेली के छात्र नेता इमरान अंसारी ने मामले से उन्हें अवगत कराया था।
यह था मामला
इमरान अंसारी ने बताया कि एमए उर्दू में आठ पेपर होते हैं, जिनमें चार प्रथम वर्ष और चार फाइनल ईयर में लेने होते हैं। इसमें ऐसा कोई सिस्टम नहीं है कि कौन से पेपर पहले साल में लेने हैं और कौन से फाइनल में। यहीं पर कुछ अभ्यर्थी भटक जाते हैं। वे फाइनल ईयर में भी वही पेपर चुन लेते हैं, जो प्रथम वर्ष में लिए होते हैं। ऐसे में जिसने एक पेपर रिपीट किया है, उसे तो इंप्रूवमेंट परीक्षा देने का मौका मिल जाएगा लेकिन जिसके एक से ज्यादा पेपर हैं, वे इंप्रूवमेंट परीक्षा भी नहीं दे सकते। इस गड़बड़ी से वर्ष 2018-19 के रिजल्ट में बरेली और मुरादाबाद मंडल के करीब सौ छात्र-छात्राएं प्रभावित हुए हैं।