प्रदेश में मर रहे सिंगल स्क्रीन के सिनेमा हॉल को नया जीवन देने के लिए बनाई गई नीति में संशोधन की तैयारी जोरों पर है।
इनकी खाली जमीनों पर मॉल व मल्टीप्लेक्स बनाने को हरी झंडी तो दे दी गई लेकिन नक्शा पास होने में काफी कठिनाइयां आ रही हैं।
लिहाजा पेचीदगियों को दूर करने के लिए नियमों को और सरल किया जाएगा। इसके तहत सिंगल स्क्रीन वाले सिनेमा हॉल को तोड़कर बनाने के लिए कैम्प लगाकर नक्शे पास किए जाएंगे।
सूबे में मॉल व मल्टीप्लेक्स के लिए 1999 में नीति बनी। इसके आधार पर कानपुर और गाजियाबाद में सबसे पहले मल्टीप्लेक्स खुले।
मनोरंजन कर विभाग ने वर्ष 2011 में सर्वे कराया तो सामने आया कि 1,118 में से 408 सिंगल स्क्रीन के सिनेमा हॉल बंद हो चुके हैं।
सिंगल स्क्रीन के सिनेमा हॉल मालिकों ने मर रहे धंधे को पुनर्जीवन देने के लिए राज्य सरकार से गुहार लगाई।
सिंगल स्क्रीन सिनेमा हॉल मालिकों की मांग पर वर्ष 2011 में तत्कालीन बसपा सरकार ने नई नीति बनाई।
इसके मुताबिक सिंगल स्क्रीन वाले सिनेमाहॉलों को तोड़कर उसका व्यावसायिक इस्तेमाल करने करने की इजाजत तो दे दी गई लेकिन इसके साथ ही 125 सीटों का सिंगल स्क्रीन सिनेमा हॉल बनाने की शर्त भी जोड़ दी गई।
यही नहीं इसके साथ यह शर्त भी जोड़ दी गई कि सिनेमा हॉल तोड़कर निर्माण करने के लिए विकास प्राधिकरण या आवास विकास परिषद से नक्शा पास कराना होगा और सुधार कराना है तो जिलाधिकारी की इजाजत जरूरी है।