रायबरेली में अखिलेश यादव की रथ यात्रा।
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रायबरेली को विपक्ष और खासकर कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है। यहां से चुनावी बिगुल फूंककर सपा अपने पिछड़ा, दलित व अल्पसंख्यक फॉर्मूले को जमीन पर और आक्रामक तरीके से उतारना चाहती है। साथ ही यह संदेश भी देना चाहते हैं कि कहीं भी उनके कार्यकर्ताओं के साथ अपमान होता है तो वे सबसे पहले साथ खड़े हैं। यहां बता दें कि वर्ष 2022 के चुनाव में सपा ने रायबरेली में 6 में से 4 विधानसभा सीटें जीती थीं।
सफलता तो कभी हार की पटकथा लिखती रही हैं अखिलेश की रथ यात्राएं
2012 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अखिलेश ने समाजवादी विकास रथ यात्रा निकाली थी। उसने पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीतिक हवा बदल दी थी और पार्टी को पूर्ण बहुमत की सत्ता दिलाई थी। इसके बाद 2017 और 2022 के चुनावों में भी अखिलेश यादव ने रथ को अपना मुख्य हथियार बनाया। हालांकि, इन दोनों चुनावों में अपेक्षित परिणाम नहीं मिले, लेकिन 2022 की यात्रा ने पार्टी के वोट बैंक और सीटों में भारी इजाफा किया था। वहीं, लोकसभा-2024 की रथयात्रा ने उन्हें देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी तक पहुंचा दिया।
चुनावी मोड में सपा
रैली में उमड़ा भारी भीड़ और कार्यकर्ताओं के हुजूम से सपा ने यह साफ कर दिया है कि वह चुनावी मोड में आ चुकी है। अखिलेश यादव ने स्थानीय कार्यकर्ताओं और हाल ही में विवादों में रहे छात्र नेताओं से मुलाकात कर जमीनी पकड़ मजबूत करने का संदेश दिया। विपक्ष को घेरने के लिए भाजपा ने भी इस क्षेत्र में पोस्टर वॉर शुरू कर दिया था, जो इस यात्रा के बड़े राजनीतिक प्रभाव को दर्शाता है।
अखिलेश ने स्पष्ट कर दिया कि इस बार वोट का बुलडोजर सत्ता पक्ष की नीतियों को खत्म करने का काम करेगा। अपनी इस रणनीति में अखिलेश कितना सफल होते हैं, यह तो भविष्य ही बताएगा।