कक्षा नौ में पढ़ने वाली 12 वर्ष की छात्रा ऑनलाइन चेस खेलने के शौक में राह से भटक गई। ऑनलाइन पढ़ाई के बीच उसका वक्त ऑनलाइन गेम में बीतता। एक दिन उसने नस काट ली, तब पता चला की वह साइबर ब्लैकमेलिंग का शिकार हो गई है। माता-पिता बदनामी और कॅरिअर के डर से रिपोर्ट दर्ज कराने से बचे। फिलहाल मामला 181 वन स्टॉप सेंटर के पास है। बच्ची को अवसाद से निकालने का प्रयास जारी है।
मुरादाबाद से लखनऊ आ गया नौकरशाह का बेटा
चाइल्ड लाइन के आंकड़े बताते हैं कि ऑनलाइन पढ़ाई से पैदा हुई बोरियत दूर करने की कोशिश में बच्चे अपराध का शिकार हो रहे हैं। हाल ही में कक्षा नौ का छात्र मुरादाबाद से भाग कर लखनऊ पहुंचा। वह एक ब्यूरोक्रेट का बेटा है। पिछले दो महीने में ऐसे करीब छह मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें ऑनलाइन गेम खेलने से रोकने पर बच्चों ने घर छोड़ दिया।
181 वन स्टॉप सेंटर की प्रशासनिक अधिकारी अर्चना सिंह का कहना है कि दो माह में साइबर ब्लैकमेलिंग के 10 मामले हमारे पास आए हैं। हालांकि, दोनों बच्चियों के मामले ज्यादा चौंकाने वाले हैं। ऑनलाइन सिस्टम आज की जरूरत है, पर ये बच्चों को अपराध की ओर ले जा रहा है। इस पर माता-पिता को बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
तलाशना होगा बीच का समाधान
बाल कल्याण समिति की सदस्य डॉ. संगीता शर्मा का कहना है कि यह समस्या आज हर अभिभावक की है। माता-पिता कहते हैं कि हर वक्त नजर रखना कैसे संभव है। यह चुनौतीपूर्ण है, लेकिन बीच का समाधान ढूंढना होगा, क्योंकि बच्चों का भविष्य दांव पर है।