बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते नौनिहाल मिड-डे मील (एमडीएम) के अनाज के लिए तीन किलोमीटर तक की दौड़ लगाने को मजबूर हैं। मालूम हो कि कोरोना के चलते छह माह बाद एमडीएम का वितरण सरकारी स्कूल के बच्चों को इसी माह से राशन दुकानों से वितरित किए जाने का कार्य शुरू हुआ है।
इसके तहत चौक के बच्चों को वजीरगंज में, हसनगंज के बच्चों को डालीगंज व अमीनाबाद की राशन दुकानों की पर्ची देकर अनाज लेने को भेजा जा रहा है। इसके अलावा एक ही राशन दुकान पर 20 से 30 बच्चों को एमडीएम का आवंटन कर देने से बच्चों, अभिभावक और कोटेदारों को परेशानी हो रही है।
नाराज कोटेदारों का कहना है कि दुकान में जगह की कमी के चलते एक साथ कई बच्चों के आने से कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराना बड़ी चुनौती बन रहा है। संक्रमित होने का खतरा भी बढ़ गया है। राशन दुकान विक्रेता संघ ने चेताया है कि ऐसे में एमडीएम का वितरण बंद करना पड़ सकता है।
यूपी सस्ता गल्ला परिषद के अध्यक्ष अशोक मेहरोत्रा ने बताया कि बच्चों के घर के आसपास की दुकानों में ही एमडीएम देने की बात कहीं गई थी। लेकिन जिम्मेदारों के मनमाने आदेश से परेशानी उठानी पड़ रही है। कोटेदारों ने डीएम को पत्र भेज कर शिकायत की है। वहीं, जिला आपूर्ति अधिकारी सुनील सिंह का कहना है कि एक क्षेत्र में आठ से 10 दुकानों को ही एमडीएम वितरण के लिए चिह्नित किया गया है। बीएसए से बातचीत कर परेशानी को दूर कराया जाएगा।