मुख्य सचिव डॉ. अनूपचंद्र पांडेय ने सरकारी कर्मियों को सेवा संबंधी लाभ उपलब्ध कराने में अत्यधिक देरी और इसकी वजह से बढ़ रही मुकदमेबाजी के लिए जिम्मेदार अफसरों पर सख्त नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा है कि ऐसे मामलों से सरकार की छवि धूमिल होती है। जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही तय की जाएगी।
मुख्य सचिव ने बृहस्पतिवार को जारी एक शासनादेश में विभागीय अफसरों की लचर कार्यप्रणाली का विस्तार से हवाला दिया है। उन्होंने अफसरों को निर्देशित किया है कि वे सरकारी कर्मियों को नियमानुसार दिए जाने वाले सभी सेवा लाभ समय से उपलब्ध कराएं। इस संबंध में प्राप्त प्रत्यावेदनों का निस्तारण प्राथमिकता पर करें ताकि कर्मी न्यायालय जाने को मजबूर न हों।
यदि किन्हीं अपरिहार्य परिस्थितियों में न्यायालय में वाद दाखिल किए जाएं तो सरकार की ओर से ठोस पैरवी होनी चाहिए। हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों के विरुद्ध या तो समय से अपील की जाए या उसका अनुपालन कराया जाए।
किसी भी दशा में अवमानना की स्थिति नहीं आनी चाहिए। यदि किसी वजह से अवमानना की स्थिति आती है तो उसमें उन कारणों का तिथिवार ब्योरा दिया जाए जिससे अवमानना की स्थिति पैदा हुई।
देरी के लिए जिम्मेदार कर्मी का उत्तरदायित्व भी तय किया जाए। अवमानना प्रकरणों में संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव या सचिव की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है कि वह अपर मुख्य सचिव कार्मिक सहित सभी संबंधित परामर्शी विभागों से समन्वय स्थापित कर प्ररकण का निस्तारण कराएं।
मुख्य सचिव ने अफसरों को सुनाई खरी-खरी
कई बार प्रशासकीय विभाग सेवा व चयन संबंधी प्रकरण में काफी देर कर देते हैं जिससे मुख्य सचिव को अपूर्ण अभिलेखों के आधार पर आपातकालीन विभागीय चयन समिति में विचार करना पड़ता है।
इससे कार्मिक विभाग और शासन को असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है।
कई मामलों में सामने आया है कि न्यायालयों में जारी अवमानना वादों की सुनवाई में अंतिम अवसर या व्यक्तिगत उपस्थिति की स्थिति पैदा होने के बाद परामर्श के लिए प्रकरण कार्मिक विभाग को भेजे जाते हैं। ऐसी स्थिति में प्रकरण का समुचित परीक्षण कर परामर्श देने का अवसर नहीं रहता।
न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के अनुपालन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली चयन समितियों के समक्ष समुचित अभिलेख के साथ प्रस्ताव नहीं दिए जाते हैं। इससे याची न्यायालयों के समक्ष अवमानना वाद दाखिल करने पहुंच जाते हैं। विधिक बाध्यता व अपरिहार्य परिस्थितियों में प्रशासकीय विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए आधे-अधूरे प्रस्ताव पर चयन समिति की बैठकें करनी पड़ती हैं।