हाईकोर्ट में लंबित सरकारी वादों की पैरवी में शिथिलता कई विभागों के अफसरों को भारी पड़ने जा रही है। कई विभागों में प्रति शपथ पत्र दाखिल करने के लंबित मामले घटने के बजाय बढ़े हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐसे सभी विभागों पर नाराजगी जताई है। इस पर मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों में अधिकारियों का उत्तरदायित्व तय करने का निर्देश दिया है।
मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने गत 11 जून को इलाहाबाद हाईकोर्ट की इलाहाबाद व लखनऊ पीठ में लंबित वादों में प्रति शपथ पत्र दाखिल किए जाने की स्थिति की समीक्षा की थी। यहां 24 विभागों में जनवरी 2012 से 11 जून, 2021 तक प्रति शपथ पत्र दाखिल किए जाने के लिए लंबित वादों व 5 नवंबर, 2020 को संपन्न बैठक के दौरान प्रति शपथ पत्र दाखिल करने के लिए लंबित वादों की रिपोर्ट पेश की गई। पता चला 15 विभागों में ऐसे वाद कम हुए हैं जबकि 9 में बढ़े हैं।
मुख्य सचिव ने बैठक में निर्देशित किया कि ऐसे विभाग जहां प्रति शपथ पत्र दाखिल करने के लिए लंबित वादों की संख्या में वृद्धि हुई है और प्रति शपथ पत्र समय सीमा में दाखिल नहीं कराया जा रहा है, उनके उत्तरदायी अधिकारियों का उत्तरदायित्व तय किया जाए और विशेष अभियान चलाकर लंबित वादों में समय के भीतर पर प्रति शपथ पत्र दाखिल करने की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। इसी तरह जिन विभागों के अधिकारियों द्वारा वादों में प्रति शपथ पत्र दाखिल करने में रुचि नहीं ली जा रही है उनको चिह्नित कर सूची तलब की गई है।
ये निर्देश भी जारी
- जिन्हें विभागों में प्रति शपथ पत्र दाखिल किए जाने के लिए वादों की संख्या कम है, उन सभी में अभियान चलाकर एक माह में प्रति शपथ पत्र दाखिल कराया जाए।
- प्रत्येक प्रशासकीय विभाग अपने विभाग के नोडल अधिकारी के माध्यम से महाधिवक्ता कार्यालय की वेबसाइट पर प्रति शपथ पत्र दाखिल किए जाने की अपडेटिंग सुनिश्चित कराएं अन्यथा की स्थिति में उत्तरदायित्व तय किया जाए।
- प्रत्येक प्रशासकीय विभाग ऐसे पांच जिले चिह्नित करेंगे जिनमें सबसे कम प्रति शपथ पत्र दाखिल किए गए हैं अथवा जिनके द्वारा दाखिल करने में रुचि नहीं ली जा रही है। ऐसे जिलों के अधिकारियों का उत्तरदायित्व तय कर एक सप्ताह में विवरण न्याय विभाग को उपलब्ध कराया जाए।
इन विभागों में वाद बढ़े
विभाग बढ़े वादों की संख्या
वित्त 76
पंचायतीराज 66
संस्थागत वित्त 45
कृषि 45
गृह 30
ग्रामीण विकास 19
नियुक्ति 19
ऊर्जा 16
गन्ना उद्योग एवं चीनी विकास 03