सीएम योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद व दिनेश शर्मा
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा डॉ. दिनेश शर्मा के अब उच्च सदन विधान परिषद के जरिये विधान मंडल सदस्य बनने के आसार बढ़ गए हैं। बावजूद इसके भाजपा की मुसीबत कम नहीं हुई है। कारण, भाजपा को इन तीनों के अलावा दो राज्यमंत्रियों स्वतंत्र देव सिंह व मोहसिन रजा की भी कुर्सी सुरक्षित रखने के लिए 18 सितंबर से पहले उन्हें विधान मंडल का सदस्य बनाना जरूरी है जबकि नियमों की बाध्यता के चलते इनमें सिर्फ चार चेहरे ही परिषद में पहुंच पाएंगे।
परिषद में हालांकि सात सीटें खाली हैं, जिनमें एक स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र कोटे की सीट पर उपचुनाव की अभी घोषणा नहीं हुई है। दो रिक्त सीटों पर नियमों के चलते उपचुनाव नहीं होगा।
चुनाव आयोग ने बृहस्पतिवार को परिषद की चार खाली सीटों पर 15 सितंबर को उपचुनाव कराने का एलान किया है। पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने की तारीख 18 सितंबर तय की गई है। जाहिर है कि भाजपा के रणनीतिकार अब अगर किसी से त्यागपत्र दिलाकर अपने किसी मंत्री का पद बरकरार रखने की कोशिश भी करें, तो यह संभव नहीं है।
कारण, त्यागपत्र से खाली होने वाली सीट पर इतनी जल्दी अधिसूचना जारी होकर 18 सितंबर से पहले चुनाव संभव नहीं है। ऐसी पेचीदगी सामने आने से भाजपा के रणनीतिकारों की अनुभवहीनता उजागर हो गई है। साथ ही साबित हो गया है कि पूरी प्रक्रिया समझे बिना ही सीटें खाली करा ली गईं। बदायूं स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र की खाली सीट पर भी 18 सितंबर से पहले किसी का चुना जाना संभव नहीं है।
विधानसभा का भी दरवाजा बंद
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हालांकि विधानसभा में भी एक सीट खाली है। यह सीट कानपुर के सिकंदरा से भाजपा विधायक मथुरा पाल के निधन से रिक्त हुई है, पर इसके उपचुनाव की अभी तक अधिसूचना जारी नहीं हुई है।
विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने में अमूमन लगने वाले एक महीने के वक्त और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए मुख्यमंत्री, दोनों उप मुख्यमंत्रियों और दोनों राज्यमंत्रियों में से किसी के भीइस सीट से चुनाव लड़कर विधानमंडल में पहुंचने की संभावना खत्म हो गई है।
फिर, भाजपा यहां से किसी को लड़ाकर कानपुर से आगरा के बीच बड़ी संख्या में मौजूद इस बिरादरी को नाराज नहीं करना चाहेगी। साफ है कि भाजपा के रणनीतिकारों के लिए मुख्यमंत्री योगी सहित दो उप मुख्यमंत्रियों और दो राज्यमंत्रियों का 18 सितंबर तक विधानमंडल पहुंचाना काफी मुश्किल है।
क्या हैं विकल्प
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मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए भाजपा के पास सीमित विकल्प बचे हैं। पहला, वह इनमें से किसी को दुबारा मंत्री बनाने का आश्वासन देकर फिलहाल त्यागपत्र दिलवाए और आगे उसके विधानमंडल की सदस्यता का प्रबंध करके फिर मंत्रिपरिषद में ले।
दूसरा, किसी एक की कोई नई भूमिका तय कर उसका समायोजन करे। जैसे केशव मौर्य को उत्तर प्रदेश से हटाकर केंद्रीय मंत्रिपरिषद में प्रभावी भूमिका में समायोजित करे और फिर यहां चार लोगों का समायोजन करा ले। इसके अलावा एक विकल्प यह भी है कि किसी से एक दिन के लिए त्यागपत्र दिलाकर अगले दिन फिर शपथ दिलाकर काम चलाया जाए।
हालांकि एक दिन त्यागपत्र और उसके अगले दिन शपथ को कुछ मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने अच्छा नहीं माना है। संविधान विशेषज्ञ डॉ. सुभाष कश्यप के मुताबिक, सर्वोच्च न्यायालय राजनीतिक दलों से ऐसा न करने की अपेक्षा कर चुका है। कह चुका है कि त्यागपत्र दिलाकर फिर संबंधित मंत्री की नियुक्ति अनैतिक व औचित्य के विरुद्ध है। बावजूद इसके इसमें कोई कानूनी अड़चन नहीं है।